वाराणसी। विजिलेंस की जांच के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की अरबों की संपत्ति का पता चला है। सबसे ज्यादा बेनामी संपत्ति यादव के करीबी साधु काने (राजमन) और निजी चालक महेंद्र मौर्या के नाम से खरीदी गई है। इन दोनों के अलावा भी कई अन्य लोगों के नाम पर वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ समेत कई शहरों में संपत्ति खरीदी गई है। आरएस के खिलाफ विजिलेंस टीम सोमवार को एंटी करप्शन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
चंदौली का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव फिलहाल मिर्जापुर जिला जेल में है। भ्रष्टाचार और संपत्ति की जांच विजिलेंस कर रही है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी संपत्ति की जांच में जुटा है। शासन ने भ्रष्टाचार के मामले में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दे दी है। विजिलेंस के मुताबिक आरएस यादव ने अपने करीबी साधु काने नामक व्यक्ति के खिलाफ आशापुर में चार प्लॉट खरीदे हैं। इसकी कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है। गोरखपुर के तिवरान गांव में भी संपत्ति खरीदी गई है। कई बैंकों में उसके खाते भी हैं। साधु गोरखपुर का ही रहने वाला बताया गया है। वहीं महेंद्र मौर्या के नाम से छावनी क्षेत्र स्थित होटल वेस्ट इन केे अलावा वाराणसी और गोरखपुर में कई प्लॉट खरीदे गए हैं। साधु काने और महेंद्र का पूर्व में कोई व्यवसाय नहीं रहा है। उनकी निजी हैसियत भी ऐसी नहीं कि वे इतनी संपत्ति बना सकें। आरएस यादव और उसके करीबियों के बैंक खातों की भी पड़ताल की गई है। उनके खातों में भी करोड़ों रुपये जमा होने का पता चला है।