फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीआरवी और लालपुर चौकी पुलिस की लापरवाही बनी मौत की वजह

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। ऐढ़े निवासी चौकीदार राजकुमार चौहान की मौत की अहम वजह यूपी 100 पीआरवी के पुलिसकर्मियों की लापरवाही और लालपुर चौकी के पुलिसकर्मियों की अनदेखी रही। परिजनों का कहना है कि पीआरवी के पुलिसकर्मियों ने ऑटो खड़ा कराया तो लालपुर चौकी पर सूचना क्यों नहीं दी। जब लोग लालपुर चौकी पर ऑटो खोजने गए, तब पुलिस ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई। पुलिस की इस लापरवाही की वजह से हमलावरों का हौसला बढ़ा और ऑटो ले जाने से मना करने पर राजकुमार पर हमला किया।
विज्ञापन

बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पर मंगलवार दोपहर मौजूद राजकुमार के परिजनों और ग्रामीणों का कहना था कि ऑटो को एक प्राइवेट चौकीदार की देखरेख में खड़ा कराने की पुलिस को क्या आवश्यकता थी। संभवत: पुलिसकर्मी ऑटो से संबंधित लोगों से पैसा वसूलना चाह रहे थे। पीआरवी के पुलिसकर्मी ऑटो को लालपुर चौकी क्यों नहीं ले गए। लालपुर चौकी इंचार्ज ने भी प्रकरण पर ध्यान क्यों नहीं दिया। परिजनों ने पुलिस के आला अफसरों से मांग की है कि घटना के लिए जिम्मेदार पीआरवी और लालपुर चौकी के लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए।
सरकारी आवासों की चौकीदारी करता था राजकुमार
ऐढ़े निवासी राजकुमार गांव में ही बनवाए गए सरकारी आवासों की चौकीदारी करता था। पुलिस के अनुसार, प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ऐढ़े में जहां टेंट सिटी बनाई गई थी, वहीं रविवार रात कुछ लोग ऑटो खड़ा कर शराब पी रहे थे। ग्रामीणों की सूचना पर पीआरवी पहुंची तो शराब पी रहे लोग ऑटो छोड़ कर भाग गए। पीआरवी के पुलिसकर्मी राजकुमार की देखरेख में ऑटो छोड़ कर चले गए और मोबाइल नंबर देकर कहा कि कोई लेने आए तो बात करा देना। सोमवार को कुछ लोग लालपुर चौकी पर गए और ऑटो के बारे में पूछा तो पुलिसकर्मियों ने अनभिज्ञता जताई। ग्रामीणों के अनुसार, शाम को तीन बाइक पर सवार नौ लोग आए और ऑटो ले जाने लगे। राजकुमार ने पुलिस से बात करने के लिए कहा तो कहासुनी शुरू हुई और बाइक सवार लोगों ने डंडे और लात-घूंसों से राजकुमार को जमकर पीटा। ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के अनुसार, सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोट की वजह से राजकुमार की मौत हुई है।
विज्ञापन

मां और पत्नी बेसुध, मासूम बेटे को कुछ समझ न आया
राजकुमार की मौत होते ही उनकी मां अमरावती देवी और पत्नी रिंकू की हालत बेसुधों जैसी हो गई। वहीं, राजकुमार का 10 वर्षीय बेटा करन कुछ समझ नहीं पा रहा था और मां व दादी को रोते देख बिलख रहा था। परिजनों ने बताया कि किसान उमाशंकर चौहान के दो बेटों में राजकुमार बड़ा था। छोटा प्रदीप कपड़े सिलने का काम करता है। राजकुमार चार-पांच साल से चौकीदार कर परिवार का पालन-पोषण करता था।
रिंग रोड के किनारे रोजाना अराजक तत्वों का जमावड़ा
ऐढ़े सहित आसपास के अन्य गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन के बाद क्षेत्र में पुलिस की गश्त कम हो गई है। रोजाना शाम होते ही रिंग रोड के किनारे अराजक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। वह खुलेआम शराब पीते हैं और कहासुनी व मारपीट करते हैं। यदि पुलिस सक्रियता से गश्त करती तो राजकुमार की जान न जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें