वाराणसी। मन में उमड़ते-घुमड़ते सहज भावों पर चढ़ा सरल अक्षरों का लिबास और अंदाज घुमक्कड़ी...। यही यायावर की स्याही की खासियत है, जो कोरे कागज पर युवा किस्सों की नई पंक्तियां गढ़ती जा रही है। ओम प्रकाश यायावर बिहार के आरा जिले के बाशिंदे हैं। अब तक उनके दो उपन्यास आ चुके हैं।
बीएचयू से पत्रकारिता के छात्र ओम प्रकाश को लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से था। बीएचयू में यह परवान चढ़ा। बीएड की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ‘खोया खोया चांद’ उपन्यास लिखा। इसमें बीएचयू के ही एक छात्र और छात्रा की प्रेम कहानी को उन्होंने बखूबी पिरोया। युवाओं ने इसे इतना सराहा कि यायावर ने इसे नए कलेवर में पेश कर ‘काशी टेल’ नाम दिया।
हाल में आया उनका दूसरा उपन्यास ‘आपका रसिया’ भी युवाओं में लोकप्रिय हो रहा है। पहले उपन्यास में जहां यायावर ने प्रेम कहानी गढ़ी थी, वहीं ‘आपका रसिया’ में त्रिकोणीय प्रेम कहानी लिखी जिसमें प्यार को लेकर नई पीढ़ी की सोच के साथ सस्पेंस भी है। उनका एक तीसरा उपन्यास ‘काशीयाना’ इसी साल आ जाएगा। इसमें काशी का एक अनूठा किस्सा होगा। यायावर कहते हैं कि आज के दौर के युवाओं को भले ही नई वाली हिंदी लुभा रही हो लेकिन मेरी सरल हिंदी ने मुझे साहित्य जगत में एक अलग मुकाम दिलाया है।