वाराणसी। राजघाट से रामनगर तक फैले कछुआ अभयारण्य को स्थानांतरित करने का आदेश जल्द ही जारी हो सकता है। इसके लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय की सेंट्रल इंपॉवर्ड कमेटी (सीईसी) ने हरी झंडी दे दी है। अब सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी के हस्ताक्षर बाकी रह गए हैं। यहां से भी जल्द ही अनुमति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
शवदाह से होने वाले प्रदूषण से गंगा को मुक्त रखने के लिए वन विभाग ने 1987 में रामनगर से लेकर खिड़किया घाट राजघाट तक कछुआ अभयारण्य बनाया और यहां मांसाहारी कछुए छोड़े जाने लगे। तब से अब तक लगभग 40 हजार कछुए छोड़े जा चुके हैं, लेकिन यहां चल रहे मोटर बोट और अन्य गतिविधियों से कछुए यहां से पलायन कर जा रहे हैं। ऐसे में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस अभयारण्य को स्थानांतरित करने की योजना बनाई।
इसके लिए गठित वाइल्ड लाइफ एडवाइजरी कमेटी ने जांच की। रिपोर्ट में कहा गया कि कछुए डाउन स्ट्रीम की ओर चले जा रहे हैं, जिससे अभयारण्य प्रभावित हो रहा है। इसके बाद इसे प्रयागराज और सीतामढ़ी के बीच शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। यह योजना अब अंतिम पड़ाव पर है। इसे वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने हरी झंडी दे दी है। अब यह फाइल सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी के पास है। यहां अंतिम मुहर लगने के बाद अभयारण्य स्थानांतरित करने का काम शुरू हो जाएगा।
गंगा में छोड़े जाएंगे 640 कछुए
जब तक अभयारण्य स्थानांतरित नहीं होता है, तब तक वन विभाग के प्रजनन केंद्र में तैयार होने वाले कछुए काशी में ही छोड़े जाएंगे। वर्तमान में प्रजनन केंद्र में कुल 850 कछुए हैं। इनमें से शाकाहारी और मांसाहारी 640 कछुए गंगा में छोड़े जाने की तैयारी है।