वाराणसी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक कार्यालय की तलाशी के लिए मंगलवार को अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस ने सर्च वारंट मांगा है। पुलिस के अनुसार, आयोग के अधिकारी एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के संबंध में मांगी गई जानकारियां देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। ऐसे में आशंका है कि धांधली से संबंधित अहम दस्तावेज नष्ट किए जा सकते हैं, जबकि इन्हें कब्जे में लिया जाना जरूरी है। इस पर सुनवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत के विशेष न्यायाधीश के अवकाश से लौटने के बाद होगी।
यूपीपीएससी द्वारा जुलाई 2018 में आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का खुलासा कर एसटीएफ ने बीती 28 मई को चोलापुर थाने में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही प्रश्न पत्र छापने वाले कोलकाता निवासी प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार और परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को गिरफ्तार किया था। विवेचक सीओ पिंडरा अनिल राय के अनुसार, बीती 31 मई से आयोग से मुकदमे से संबंधित सवालों के जवाब और दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, लेकिन इस पर आनाकानी की जा रही है।
आठ जून को जिला जेल में अंजू कटियार से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि सेफ कस्टडी लॉकर और कार्यालय की चाबी पति अखिलेश वर्मा के माध्यम से सीलबंद लिफाफे में आयोग के सचिव को भेज दी गई थी। इन परिस्थितियों में सेफ कस्टडी लाकर और कार्यालय में रखे मुकदमे से संबंधित कागजातों में हेरफेर और उन्हें नष्ट करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए तलाशी कर कागजातों और अन्य साक्ष्यों को कब्जे में लिया जाना बेहद जरूरी है।
सात नामजद आरोपियों का सुराग नहीं
भर्ती परीक्षा में धांधली के अन्य सात नामजद आरोपियों के बारे में मुकदमा दर्ज होने के 15 दिन बाद भी पुलिस को कोई जानकारी नहीं है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमें गठित की गई थीं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।