वाराणसी। गंगा का जल स्तर घटने और जरूरत से ज्यादा जल दोहन से भूजल स्तर काफी नीचे जाने का असर का जल आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। जलकल विभाग ने पेयजल संकट से निपटने की तैयारियों को लेकर अलर्ट जारी किया है। साथ ही गंगा में पानी छोड़ने के लिए केंद्रीय जल आयोग के चीफ इंजीनियर को पत्र लिखा है।
गंगा का जलस्तर दो सौ फीट रहने तक ही जल की आपूर्ति सामान्य रहती है। गुरुवार को गंगा का जलस्तर 192 फीट दर्ज किया गया। हालांकि यह पिछले साल जून में गंगा के जलस्तर 187 फीट से अधिक हैं, लेकिन इसका असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ने लगा है। यहां लगाए गए पंप पानी कम देने लगे हैं। गंगा में पानी की कमी से परेशान जलकल विभाग ने गुरुवार को वाटर अलर्ट जारी किया गया।
शहर के अधिकांश इलाकों प्रतिदिन होने वाली 276 एमएलडी पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्त्रोत गंगा ही हैं। वहीं, भदैनी स्थित रॉ-वॉटर पंपिंग स्टेशन से जलकल के भेलूपुर परिसर में बने भूमिगत जलाशय में आपूर्ति की जाती है। पंपिंग स्टेशन पर गंगा का वर्तमान जलस्तर 192 फु ट है जो न्यूनतम चेतावनी बिंदु से तीन फ ीट ही ज्यादा है। यदि पानी और घटा तो भदैनी में लगे दो में से एक पंप बंद करना पड़ेगा। जलकल के महाप्रबंधक नीरज गौड़ का कहना है कि गंगा के जल स्तर में तेज गिरावट को देखते हुए पानी छोड़ने के लिए पत्र लिखा गया है।