वाराणसी। विकास कार्यों के नाम पर शहर के कई इलाकों में सड़कों की खुदाई की गई है। इसके चलते उड़ने वाली धूल और गड्ढे लोगों को बीमार बना रहे हैं। चिकित्सक भी मानते हैं कि धूल और गड्ढों से लोग सांस, फेफड़े, आंख, त्वचा, कमर और गर्दन दर्द जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यही नहीं, जब इन इलाकों से वाहन गुजरते हैं तो धूल का गुबार उठता है। इससे ग्राहक वहां जाने से बचते हैं, जिससे व्यापार भी चौपट हो रहा है।
पांडेयपुर, सारनाथ, भोजूबीर, महमूरगंज, चौकाघाट और फुलवरिया में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इसके लिए कई जगहों पर सड़कों की खुदाई की गई है। भोजूबीर के व्यापारी विनोद कुमार ने बताया कि धूल से बचने के लिए ग्राहक दुकान पर नहीं आते हैं। हवा चलने पर धूल दुकान में भर जाती है और दुकान में रखे नए कपड़े पुराने दिखने लगते हैं। फुलवरिया के अमित कुमार सिंह ने कहा कि फोरलेन के लिए कई जगहों पर काम चल रहा है। पहले जनरल स्टोर्स पर ग्राहकों की भीड़ रहती है, लेकिन खुदाई होने के बाद इधर से गुजरने वाले ग्राहकों ने रास्ता ही बदल दिया है। अब इक्का-दुक्का ग्राहक ही आते हैं।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि धूल से कई तरह की परेशानी होती है। त्वचा और आंखों में एलर्जी की समस्या होती है। बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक असर पड़ता है। शरीर के बाहरी हिस्सों पर धूल का असर अस्थायी होता है, लेकिन जब सांस के जरिए धूल शरीर के अंदर पहुंच जाती है तो वह गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती है।