वाराणसी। श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री महामहोपाध्याय प्रो. शिवजी उपाध्याय ने कहा कि श्री काशी विद्वत परिषद की बैठक के बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्र ऋषि की उपाधि देने के निर्णय गलत है। आरोप लगाया कि परिषद की न तो कोई आपात बैठक बुलाई गई और न ही सदस्यों को कोई सूचना दी गई। उपाधि देने का निर्णय परिषद का नहीं है। कुछ लोगों ने अध्यक्ष को बरगलाकर यह झूठी जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि किसी प्रस्ताव को पारित करने का एक विधान है। महामंत्री के सहायक के रूप में उसके निर्देश से मंत्री प्रस्ताव रखता है, तब बैठक में उस पर निर्णय लिया जाता है। आपात बैठक विशेष परिस्थिति में बुलाई जाती है और उसमें कोरम की पूर्ति तीन चौथाई सदस्यों द्वारा होती है। लेकिन महामंत्री, पांच उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और किसी पदाधिकारी को नहीं बुलाया गया था। केवल दो लोगों ने निर्णय करके यह झूठी खबर प्रकाशित करवाई है।
इसके अलावा राष्ट्र ऋषि शब्द अशुद्ध है और ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं है। ब्रह्मर्षि, देवर्षि के जैसे ही राजर्षि शुद्ध शब्द है। पीएम को अशुद्ध उपाधि देकर उनका सम्मान कैसे किया जा सकता है। पीएम को उपाधि देनी है तो श्री काशी विद्वत परिषद की बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से निर्णय होना चाहिए। वहीं महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।