वाराणसी। मतदान के बाद जनता का फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है और सपा-बसपा गठबंधन के नेता वोटों का हिसाब लगाने में जुट गए हैं। सोमवार को वह कार्यकर्ताओं से लेकर विधानसभा प्रभारियों से चर्चा में मशगूल रहे। सभी की जुबान पर 23 मई को होने वाली मतगणना की बात थी। हर कोई कह रहा था कि चौंकाने वाले परिणाम आएंगे। हालांकि नेताओं की बेचैनी साफ दिख रही है।
पार्टी के नेताओं ने वोटर लिस्ट की खामियों पर भी चर्चा की। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की वजह से कई मतदाता मताधिकार से वंचित हो गए। कई बूथों पर मतदाता पहचान पत्र होने के बाद भी सूची में नाम न होने से वोट डालने से वंचित हो गए। इसके अलावा यादव, मुस्लिम और दलित क्षेत्रों में मिलने वाले वोटों का हिसाब लगाया गया। पार्टी को कितने मिले और विपक्षी खेमें में कितने गए, इस गणित में नेता उलझे रहे। इसी आधार पर पार्टी को सूचना भी भेजी गई। गठबंधन के एक पदाधिकारी ने बताया कि कई बूथों पर हम लोग आगे रहे तो कई बूथों पर विपक्षी पार्टियां हावी रहीं।
सपा-बसपा गठबंधन के नेता नेताओं का ध्यान अब एग्जिट पोल पर है। सोमवार को पार्टी कार्यालयों में पदाधिकारियों की आवाजाही कम रही। जो आए, वे टीवी चैनलों के एग्जिट पोल के हिसाब से नतीजों के विश्लेषण में जुटे रहे। पार्टी के नेता अंतिम चरण के मतदान का फीडबैक भी ले रहे हैं। वहीं कई नेता पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वासन देते रहे। सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव ने कहा कि कोई भी एग्जिट पोल सही जानकारी नहीं दे रहा है। जनता का फैसला 23 को पता चल जाएगा। सपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल ने कहा कि यूपी में गठबंधन अच्छी लड़ाई लड़ा है। बसपा जिला उपाध्यक्ष मेराज फारूकी जुग्गन ने कहा कि अधिकतर एग्जिट पोल सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। 23 का इंतजार करें, जनता का फैसला सारे एग्जिट पोल को धता बताएगी। यूपी में गठबंधन को बेहतर सीटें मिलेंगी।