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बौद्धिक संपदा अधिकार के प्रति जागरूकता जरूरी

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वाराणसी। बीएचयू विधि प्रकोष्ठ की ओर से सोमवार को आयोजित कार्यशाला में बौद्धिक संपदा अधिकार पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. रमेश चंद ने कहा कि बौद्धिक संपदा और बौद्धिक संपदा अधिकार दो अलग-अलग विषय है। सभी को इस बारे में जानने की जरूरत है।
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विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में बौद्धिक संपदा विषयक कार्यशाला में निदेशक ने कहा कि जागरूकता के लिए आईपीआर सेल कार्य कर रही है। बौद्धिक संपदा प्रकोष्ठ टास्क फोर्स के चेयरपर्सन प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी ने कहा कि प्रकोष्ठ की ओर से शिक्षकों और छात्रों की हर संभव सहायता की जा रही है। तकनीकी सत्रों में नई दिल्ली की पेटेंट अटार्नी प्रियंका दूबे ने बताया कि बौद्धिक संपदा की विधि से सामान्यत: अन्वेषणकर्ता परिचित नहीं होते है। इसीलिए बौद्धिक संपदा अधिकार के लिए आवेदन नहीं कर पाते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता पूजा अग्रवाल ने संपदा अधिकारी के नैतिक और सैद्धांतिक पक्षों पर प्रकाश डाला। हरियाणा से आए अधिवक्ता डॉ. एसएन पांडेय ने अलग-अलग वस्तुओं पर पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क आदि के बारे में बताया। अतिथियों का स्वागत विधि अधिकारी डॉ. अभय कुमार पांडेय ने किया। इस दौरान प्रो. आरके मुरली, मोहिनी कुमार, सीएन चक्रवर्ती, रजत मिश्रा, प्रो. एनके दूबे आदि मौजूद रहे।
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