वाराणसी। गंगा में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। कागजों पर ही गंगा की सफाई का काम सीमित है। गंगा में गिराई जा रही गंदगी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही। गंगा में गंदगी डाल रहे उद्योगों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी तक कोई जुर्माना नहीं किया है। सिर्फ नोटिस भेजकर चुप्पी साध ली जाती है।
यह खुलासा क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. राहुल सिंह द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगी गई आरटीआई के जरिए हुआ है। राहुल सिंह ने बताया कि उन्हाेंने गत 14 सितंबर को आरटीआई के जरिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से उन औद्योगिक इकाइयों की जानकारी मांगी थी जिन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में प्रदूषण फैलाने के कारण जुर्माना किया है। बोर्ड ने आरटीआई के जवाब में बताया कि बोर्ड द्वारा आज तक किसी भी औद्योगिक इकाई पर गंगा में प्रदूषण फैलाने के कारण कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है।
राहुल ने आरोप लगाया कि कई औद्योगिक इकाइयां गंगा में लगातार रासायनिक गंदगी डाल रही हैं। 1986 के पर्यावरण संरक्षण कानून के सेक्शन 15(1) के तहत बिना शोधन के रासायनिक कचरा गंगा में डालने पर पांच साल तक कारावास और एक लाख जुर्माने तक का प्रावधान है। लगातार कानून का उल्लंघन करने की अवस्था में रोजाना पांच हजार रुपये और सात साल के कारावास का प्रावधान है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में गंगा किनारे 911 औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनका पानी गंगा में मिलता है। इनमें से 211 ऐसी हैं जो प्रदूषण बोर्ड के निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरी हैं। 256 इकाइयां अस्थायी तौर पर बंद हैं।