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पारंपरिक खेल उत्सव में पहलवानों ने दिखाया दम0

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वाराणसी। भारत के विलुप्त हो रहे पारंपरिक खेलों को जीवंत करने के लिए अखाड़ा खजूर स्टेडियम में भारतीय पारंपरिक खेल उत्सव प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। वर्ल्ड एथनो स्पोर्ट्स सोसाइटी के सौजन्य से आयोजित प्रतियोगिता में शहर के अखाड़ों के पहलवानाें ने जोड़ी, गदा एवं नाल के करतब दिखाकर सभी को हतप्रभ कर दिया। प्रतियोगिता में 17 अखाड़ों के 34 पहलवानों ने अपना दम-खम दिखाया।
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रविवार की देर रात शुरू हुए मुकाबले में खेल उत्सव के प्रायोजक प्रदीप बाबा मधोक ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत के विलुप्त होते खेलों को संरक्षित करना है। यूनेस्को के सहयोग से इसे आधुनिक पीढ़ी के सामने जीवंत करना है। इसी क्रम में जुलाई में भी पारंपरिक खेल महोत्सव का आयोजन होगा। वर्ल्ड एथनो स्पोर्ट्स की ओर से इसी कड़ी में 15 अक्तूबर को राजेंद्र प्रसाद घाट पर परंपरागत खेलों की अंतररष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें पूरे भारत के पहलवान अपना दमखम दिखाएंगे। इसी दौरान पारंपरिक खेल गुल्ली डंडा का भी प्रदर्शन होगा। बाबा ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह आधुनिक खेलों की तरह परंपरागत खेलों के प्रतिभागियों को भी सरकारी नौकरी में स्पोर्ट्स कोटा के तहत नियुक्त करे। इस अवसर पर डालिम्स सनबीम स्कूल्स आफ ग्रुप की निदेशिका पूजा मधोक, माहिर मधोक, धनसु पहलवान, चंद्रमा पहलवान, वकील पहलवान एवं रेफरी रियाज पहलवान एवं जज की भूमिका में चंद्रमा पहलवान रहे। धन्यवाद ज्ञापन हाजी मुख्तार साहब ने किया।
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