वाराणसी। मकर संक्रांति पर सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहली बार खिचड़ी उत्सव मनाया गया। बाबा को 501 किलो खिचड़ी का भोग अर्पित किया गया और उसे भक्तों में वितरित किया गया। देर शाम तक 30 हजार से अधिक भक्तों ने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। गोरक्षनाथ मंदिर की तर्ज पर यहां खिचड़ी उत्सव की नई परंपरा की शुरुआत सुबह न्यास परिषद के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी निखिलेश त्रिपाठी की मौजूदगी में हुई।
इस मौके पर मंदिर की डायरी का भी विमोचन किया गया। भोग आरती के यजमान कमिश्नर और उनकी पत्नी श्रीला गोकर्ण ने भक्तों में खिचड़ी के प्रसाद का वितरण किया। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद बाबा दर्शन-पूजन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।
गोरक्षनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव के पीछे गुरु गोरखनाथ के हिमाचल के कांगड़ा जिले से जुड़े खिचड़ी प्रसंगों की अपनी मान्यताएं हैं और वहां यह मेला महीने भर तक चलता है जबकि काशी विश्वनाथ में पहली बार खिचड़ी उत्सव मनाया गया। खिचड़ी भोग पकाने के लिए ज्ञानवापी परिसर स्थित मिर्जापुर मठ के पास चूल्हा लगाया गया था। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का प्रसाद पाकर श्रद्धालु बेहद खुश नजर आए।
तीन चूल्हों पर तैयार हुई बाबा की खिचड़ी
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। तीन चूल्हों पर बाबा की भोग आरती के लिए 501 किलो खिचड़ी का प्रसाद तैयार किया गया। खिचड़ी में शुद्ध देसी घी मिलाया गया था। खिचड़ी तैयार करने के लिए शहर के प्रमुख मठों से बर्तन मंगाए गए थे।