वाराणसी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में आयोजित प्रो. प्रदीप कुमार दीक्षित स्मृति संगीत सभा में गायन के माध्यम से प्रो. दीक्षित को याद किया गया। इस दौरान जहां उनके जीवनी को लेकर तैयार वृतचित्र का प्रदर्शन हुआ वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय से आए कलाकार प्रो. ओजेश प्रताप सिंह ने अलग-अलग रागों में गीतों की प्रस्तुति की।
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह सभागार में आयोजित सभा की शुरूआत बीएचयू से डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय द्वारा शिवाकांत शंभो शशांकार्द्ध मौली की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद शिवानी सोनकर की ओर से प्रो. प्रदीप दीक्षित पर तैयार वृत्तचित्र का प्रदर्शन हुआ। इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रो. ओजेश ने राग मुल्तानी में विलंबित एक ताल में पारंपरिक रचना लाडी थारी बात न वे... और फिर द्रुत तीन ताल में आगरा घराने की बंदिश हो मोरे मंदिरवा में की प्रस्तुति की। राग बरवा में बाजे मोरी पायलिया और अंत में राग भैरवी में बंदिश की ठुमरी कर न मोरी लागी रे, मीरा बाई के भजन नही ऐसो जन्म बार-बार से कार्यक्रम का समापन किया। तबले पर पंडित कुबेर नाथ मिश्र, हारमोनियम पर डॉ. इंद्रदेव चौधरी ने संगत किया। स्वागत और सम्मान संकाय प्रमुख प्रो. वीरेंद्र नाथ मिश्र, गायन विभाग प्रमुख प्रो. के शशि कुमार ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. संगीत पंडित, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रेवती साकलकर ने किया। इस दौरान प्रो. ऋत्विक सान्याल, प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. राजेश शाह, डॉ. के चंचल, डॉ. रामशंकर सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।