वाराणसी। छात्र राजनीति की पाठशाला कहे जाने वाले छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मी खत्म हो चुकी हैं। इस चुनाव के जरिये सक्रिय राजनीति में जगह बनाने की चाहत रखने वालों में किसी के सिर जीत का सेहरा सजा तो कोई औंधे मुंह भी गिरा। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस बार के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बेहद कमजोर साबित हुई। प्रदेश और केंद्र में भगवा परचम फहरने के बावजूद छात्रसंघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद कोई दम नहीं दिखा सकी। केवल संस्कृत विश्वविद्यालय में दो सीटें मिलने से साख जरूर बच गई।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हुए छात्रसंघ चुनाव में इस बार समाजवादी छात्र सभा और एनएसयूआई के गठजोड़ विद्यार्थी परिषद के लिए रोड़ा साबित हुई। हालांकि हाथ मिलने के बावजूद इन दोनों संगठनों के प्रत्याशी भी हार गए। सछास से बागी हुए राहुल दुबे ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। यहां विद्यार्थी परिषद खाता भी नहीं खोल सकी।
काशी विद्यापीठ में हार का मुंह देखने के बाद हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज के चुनाव से एबीवीपी ने किनारा कर लिया। यहां चारों प्रमुख पदों पर समाजवादी छात्र सभा ने कब्जा कर लिया। पिछली बार यहां के चुनाव में दो पदों पर एबीवीपी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद शनिवार को हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के चुनाव में एनएसयूआई की कुर्सी पर काबिज होकर विद्यार्थी परिषद अपनी इज्जत बचाने में कामयाब हो गई। दोनों संगठन दो-दो प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर बराबरी पर रहे। वहीं, उदय प्रताप कालेज के चुनाव में परंपरा के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से किसी छात्र संगठन ने दावेदारी नहीं की।