वाराणसी। रोजगार का झांसा देकर इलाहाबाद ले जाए जा रहे चार किशोरों को मंगलवार को कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर संदिग्ध मानव तस्कर के चंगुल से मुक्त करा लिया गया। साथी संस्था की अनीमा यादव की नजर इन पर पड़ी तो कुछ संदिग्ध स्थितियां देख उन्होंने इन्हें ले जा रहे शख्स से पूछताछ की कोशिश की तो वह भागने लगा। अनीमा ने साहस दिखाते हुए आरोपी को पीछा कर दबोच लिया और जीआरपी के आने तक उसे छोड़ा नहीं। हालांकि जीआरपी ने किशोरों को साथी संस्था की सुपुर्दगी में देने के बाद आरोपी को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया। जबकि, जानकारों का दावा है कि मानव तस्करी का एक बड़ा रैकेट बिहार, छत्तीसगढ़ से लगायत पूर्वांचल के कई जिलों तक फैला है। जीआरपी ने आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर पड़ताल की होती तो बड़ा सुराग हाथ लग सकता था।
जानकारों की मानें मानव तस्करों का गिरोह बच्चों और किशोरों को अच्छे पैसे का प्रलोभन देकर ले जाता है। वहां मोटा सौदा कर उन्हें घर, कंपनी, खेतों आदि में काम कराने के लिए छोड़ दिया जाता है। कई किशोर अपने घर नही लौट पाते। अनीमा यादव ने बताया कि पकड़े गए आरोपी अपना नाम गुड्डू बताया था लेकिन वह न तो अपने बारे में कोई पहचान पत्र दिखा सका और न ही किशोरों के बारे में। किसी बात की सही जानकारी नहीं दे रहा था। किशोरों ने बताया कि वे सोनभद्र के रहने वाले हैं। बावजूद इसके जीआरपी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। चारों किशोरों को संस्था की सुपुर्दगी में देने के बाद आरोपी को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। इस बारे में एसपी जीआरपी दीपक कुमार भट्टा का कहना है कि वह पूरे मामले की जांच कराएंगे। जो भी दोषी पाया जाएगा, कार्रवाई की जाएगी।
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कैंट रेलवे स्टेशन पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। बावजूद इसके जीआरपी सक्रिय नहीं हो रही है। यह चिंता का गंभीर विषय है। किशोरों और बच्चों की तस्करी करने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। - मनोज मिश्रा, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति