वाराणसी। भीम नगर में वरुणा की तलहटी पाटने के मामले में पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के भाई होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल ने प्रशासन की आंख में धूल झोंकने की कोशिश की है। खनन विभाग की नोटिस के जवाब में हीरालाल ने कहा है कि उन्होंने मिर्जापुर के चुनार, वाराणसी के सिकरौल और शहर में लहुराबीर स्थित प्रकाश टाकीज के मलबे से जमीन को पाटा है। जवाब का परीक्षण किया जा रहा है।
हीरालाल ने भीम नगर में वरुणा किनारे करीब चार बीघे जमीन को पाटा है। इसमें डेढ़ बीघे नगर निगम की जमीन का उन्होंने अपने पक्ष में विनिमय का आदेश कराया था। अमर उजाला में खबर छपने के बाद प्रशासन ने उक्त जमीन को नगर निगम के पक्ष में कर दी। मामले में खनन विभाग ने हीरालाल को 36 लाख रुपये जुर्माना अदा करने का नोटिस भेजा था। 25 जून को हीरालाल की ओर से उनके वकील ने नोटिस का जवाब दिया है।
जवाब में कहा गया है कि मिर्जापुर के चुनार, धौंहां में जेएचवी स्टील लिमिटेड की जमीन से तीन हजार घन मीटर खुदाई कर मिट्टी लाई गई। सिकरौल में अपनी ही जमीन से दो हजार घन मीटर में मिट्टी लाई गई। लहुराबीर स्थित प्रकाश टाकीज के मलबे से भी जमीन पाटी गई। जवाब के साथ मिट्टी के लिए खनन की अनुमति के संबंध में कोई कागजात नहीं सौंपा गया है। एडीएम प्रशासन मुनींद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि जवाब का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले ही हट चुका है प्रकाश टाकीज का मलबा
हीरालाल जिस प्रकाश टाकीज के मलबे से तलहटी पाटने की बात कर रहे हैं, दरअसल वहां का मलबा तो कई साल पहले हटाया जा चुका है। जब पड़ताल की गई तो लोगों ने बताया कि यहां मलबा था ही नहीं तो ले कहां से जाया जाएगा। टाकीज का मुख्य भवन आज भी खंडहर के रूप में खड़ा है। मुख्य भवन के पिछले हिस्से को टीन से घेरा गया है। अंदर जाने का रास्ता ही नहीं है। हीरालाल ने सिकरौल में जिस जमीन पर खनन करने की बात कही है वहां भी पड़ताल करने पर पता चला कि वहां खनन ही नहीं किया गया है।