ढाई महीने से नर्मदा की पदयात्रा कर रहे हैं काशी के संत, चिकित्सक और गृहस्थ स्वयं
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जन्म-जनमांतर के पापों के नाश के लिए काशी की पंचक्रोशी यात्रा की तरह नर्मदा पदयात्रा (परिक्रमा) निकाली जाती है। काशी के 15 साधु-संत और श्रद्धालु ये यात्रा कर रहे हैं। ढाई माह में पूरी होने वाली 3500 किलोमीटर की ये यात्रा अप्रैल में शुरू की गई थी। उन्होंने 3200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और अभी करीब 300 किलोमीटर की पदयात्रा शेष है। ये यात्रा इसी महीने पूरी हो जाएगी।
पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार पवित्र नदी नर्मदा की परिक्रमा से जन्मों के पापों का नाश होता है। आत्मिक शांति और मोक्ष के मार्ग प्रशस्त होते हैं। शाहंशाहपुर गांव के पं. अवधेश मिश्रा महाराज के नेतृत्व में करीब 15 साधु-संत और श्रद्धालु ढाई महीने से नर्मदा पदयात्रा पर निकले हैं। पं. अवधेश महाराज ने बताया कि काशी से ये जत्था पांच अप्रैल को निकला था और आठ अप्रैल को नर्मदा नदी का जल भरने के साथ ये यात्रा शुरू हुई थी। 20 जुलाई तक यात्रा पूरी होगी। इसके बाद यहां से ओंकारेश्वर धाम में पूजन-अर्चन कर काशी लौटेंगे।
पं. अवधेश मिश्रा महाराज ने बताया कि यह यात्रा सर्व कल्याण की भावना से की जा रही है। मानव के साथ जीव, वनस्पति के कल्याण की कामना की निमित्त भी है, ताकि प्रकृति सुरक्षित बनी रहे। क्योंकि जिस तरह से प्रकृति के साथ हम खिलवाड़ कर रहे हैं, इसका खामियाजा पीढि़यों को भुगतना होगा। हमारे पूर्वजों ने हमें वनस्पतियों की पूजा करना सिखाया है। जल, अग्नि, पवन को देवता के रूप में बताया। भूमि को माता का स्थान दिया। यह सब इसलिए था कि हम अपने पृथ्वी के संसाधनों का सही, संतुलित प्रयोग करें और उन्हें अच्छे से सहेज सकें। इस यात्रा में संत ओमप्रकाश मिश्रा, पं. भोलानाथ दुबे, बीएचयू के अवकाश प्राप्त चिकित्सक डॉ. प्रेमचंद आदि शामिल हैं।