वाराणसी। चीड़ी चोंच भरि ले गई नदी घटे ना नीर/दान किए धन ना घटे कह गए सत्य कबीर...। यह तन जारौं मसि करौं, लिखौं राम का नाउं/लेखणि करौं करंक की, लिखि लिखि राम पठाउं...। निर्गुण भक्ति शाखा के ऊंचे मानकों पर स्थापित संत कबीर के संदेशों पर चलने के संकल्प के साथ मंगलवार को लहरतारा प्राकट्य धाम में अनुयायियों का मेला लग गया। लहरतारा के जिस तालाब में 15वीं शताब्दी के दौरान कमलिनी नाल पर बालरूप में कबीर नीरू-नीमा नामक जुलाहा दंपती को मिले थे, वहां की धूल माथे लगाने की होड़ मच गई। संत कबीर की जयंती पर कबीरपंथियों के समागम का सिलसिला तीन दिन चलेगा।
सद्गुरु प्राकट्य धाम लहरतारा में सुबह नौ बजे आचार्य पंथश्री हजूर अर्धनाम साहेब के हाथों सत्यनाम ध्वजारोहण के साथ संत कबीर जयंती महोत्सव आरंभ हुआ। नादवंशाचार्य पंथश्री हजूर उदितनाम साहेब की ओर से बनवाए गए स्मारक में बालरूम में संत कबीर की प्रतिमा के दर्शन के लिए अनुयायियों की लंबी कतारें लग गईं। देश के कोनें-कोने से तो कबीर पंथी कंधे पर झोला लिए पहुंचते ही रहे, कनाडा, दुबई, आस्ट्रेलिया, स्विटजरलैंड समेत कई देशों से एनआरआई कबीरपंथी भी तीर्थस्थली पर हाजिरी लगाने के लिए पहुंचे। अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर के विचारों पर चले बिना दुनिया कर्तव्य पथ पर अग्रसर नहीं हो सकती। इस मौके पर धर्माधिकारी सुधाकर के अलावा भेष एवं सेवक पंच कमेटियों के संतों ने भजनों की प्रस्तुतियां कीं।