चहनियां। भीमसेन निर्जला एकादशी के अवसर पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मां गंगा के पश्चिम वाहीनी घाट बलुआ मे श्रद्धा की डुबकी लगाया। स्नान ध्यान करने का सिलसिला दिन भर निर्जल व्रत रहते हुए 24 एकादशी के बराबर मोक्ष देने का पुण्य प्राप्त किया। वहीं गंगा घाट पर सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस फोर्स डटी रही। फोर्स माइक द्वारा लोगों को किनारे पर स्नान करने की चेतावनी देती रही।
एक बार महर्षि व्यास पांडवों के यहां गए जहां पांच पांडव सहित कुंती और द्रौपदी प्रत्येक माह की एकादशी का व्रत करती थीं लेकिन भीम खाना के कायल होने के कारण एकादशी की व्रत नहीं रह पाते थे। उन्होंने महर्षि से पूछा भगवन सभी लोग एकादशी का व्रत रह कर पुण्य के भागी बनते हैं। मगर मैं भूख न बर्दास्त कर पाने के कारण यह व्रत करने में असफल रह जाता हूं। कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मैं भी कोई व्रत रहकर पुण्य का भागी बनूं। महर्षि ने बताया कि जेष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रहो। सभी 24 एकादशी का फल मिलेगा। वही व्रत भीम ने रखा। तभी से यह परम्परा चली आ रही है। इसी एकादशी के उपलक्ष्य में सोमवार को पूरे दिन श्रद्धालुओं ने निर्जला एकादशी का व्रत रह कर बलुआ स्थ्ति पश्चिम वाहिनी गंगा घाट पर स्नान कर वहां विराजमान श्री हरिनारायण का ध्यान व पूजन अर्चन कर पुण्य कमाया। गंगा घाट पर सुबह से स्नान कार्य में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय पुलिस लगी रही।