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तट पर गंगा अवतरण का उत्सव

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वाराणसी। पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर रविवार को काशी में उत्सव मनाया गया। कहीं ‘मंगल’ तो कहीं दिन भर ‘दंगल’ हुआ। अस्सी घाट से लगे मछली बंदर मठ के सामने 11 सौ कन्याओं की पूजा की गई। शीतला घाट, राजघाट पर आरती-पूजा और अनुष्ठानों के जरिए गंगा की अविरता-निर्मलता के संकल्प दोहराए गए। दूसरी ओर अस्सी घाट पर सपा नेता कुंवर रेवती रमण सिंह की मौजूदगी में टिहरी से गंगा का प्रवाह छोड़ने के लिए दिन भर सामाजिक कार्यकर्ताओं, गंगा प्रेमियों ने उपवास किया...।
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गंगा दशहरा पर सांझ ढलते ही गंगा तटों पर अनुष्ठान, आरती और अभिषेक के जरिए आस्था के मेले लगने लगे। बांधों, नहरों और नालों के चलते वेग शून्यता के कगार पर पहुंची गंगा की मुक्ति के लिए आह्वान किया गया। शीतला घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से गंगा की महाआरती की गई। सौ से अधिक पुरुष-महिला एनसीसी कैडेट्स ने गंगा तट की सफाई की।
शीतला घाट पर 51 लीटर दूध से मां गंगा का अभिषेक किया गया। समिति के संस्थापक पं. किशोरी रमण दुबे के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने महाआरती की। रिद्धि-सिद्धि के रूप में देव कन्याएं चंवर डुला रही थीं। विधायक डॉ. अवधेश सिंह के अलावा महामंडलेश्वर योगिश्वरी यति बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थी। गौरी केदार सेवा समिति की ओर से केदार घाट पर स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सामने घाट पर मां शीतला घाट समिति और सूर्या स्पोर्टिंग क्लब की ओर से गंगा आरती की गई। केंद्रीय देव दीपावली महासमिति ने भैंसासुर घाट पर गंगा की अविरलता निर्मलता के लिए आरती, अभिषेक किया। पातालपुरी के महंत बालक दास महाराज ने संदेश दिया।
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