फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रो के कहती थी सकीना मेरे बाबा से मिला दे...

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। अर्दली बाजार स्थित उल्फत बीबी के हाते में एजाज अब्बास मद्दन के निवास पर मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस के बाद जनाबे अब्बास का अलम और ताबूत उठाया गया। मजलिस को मौलाना सैयद मोहम्मद अकील हुसैनी ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के बेहतरीन सिपहसालार सरदारे लश्कर जनाबे अब्बास का नाम तारीख में दर्ज है। उनकी वफाओं की लोग कसमें खाते हैं और उन्हें अब्बास बावफा के नाम से जाना जाता है। उन्हें सक्का-ए-सकीना भी कहा जाता है।
विज्ञापन

मजलिस के बाद जुलूस में अंजुमन हैदरी, अंजुमन इमामिया, सदा-ए-अब्बास और अंसारे हुसैनी ने नौहा व मातम किया। इस अवसर पर हिंदुस्तान के जाने माने नौहेख्वानी सैयद अमीर हसन आमिर ने अपने मखसूस अंदाज में कई नौहे पेश किए। एक दिन में वो कमाल किया है हुसैन ने, सदियों का दिल बहाल किया है हुसैन ने..., रो के कहती थी सकीना मेरे बाबा से मिला दे, या इलाही मेरी बिगड़ी हुई तकदीर बना दे..., कैसे कैदी कैदखाने में..., जैसे नौहे पेश कर सैयद अमीर ने लोगों को जारोकतार रोने पर मजबूर कर दिया। संचालन मौलाना बाकर रजा बलियावी ने किया। पेशख्वानी मुनीर बनारसी, शाद सिवानी, तफ्सीर बनारसी और बालक जैन ने की। इस मौके पर जीशान भाई ने अपने साथियों के साथ सोजख्वानी की। जुलूस में सैयद अबुल हसन, मेराज हुसैन, फरहद एजाज, नबील हैदर, सबील हैदर आदि मौजूद रहे। शुक्रिया अमन मेहंदी ने अदा किया। दूसरी ओर नई सड़क स्थित शेख सलीम फाटक रिजवी हाउस पर तीन दिवसीय मजलिस का आगाज मौलाना शम्स फैजाबाद ने किया। अंजुमन हैदरी ने नौहा व मातम किया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता ने बताया रसूले खुदा की वफात और इमाम हसन की शहादत के सिलसिले से मजलिसों का दौर तीन दिनों तक चलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें