वाराणसी। पेट्रोल-डीजल के दाम पांच रुपये घटने का खूब शोर मचा मगर काशीवासियों को साढ़े चार रुपये का लाभ भी नहीं मिला। चार अक्तूबर को पेट्रोल के दाम 83.91 रुपये थे, जो शुक्रवार को घटकर 79.55 रुपये हो गए। ऐसे में केवल 4.36 रुपये की कटौती हुई। इसी प्रकार चार अक्तूबर को डीजल का मूल्य 76.15 प्रति लीटर था जो पांच अक्तूबर को घटकर 71.55 रुपये हो गया। यहां भी महज 4.60 पैसे ही हाथ लगे। ऐसे में उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर ऑटो चालकों ने भी यह कह कर किराया कम करने से मना कर दिया है कि पिछले कुछ माह में ही पेट्रोल की कीमतें दस रुपये तक बढ़ी हैं, ऐसे में इस कटौती से कोई राहत नहीं मिली। इसलिए किराया नहीं घटाया जाएगा।
ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि किराया कम करना है या नहीं इस पर बैठक में विचार किया जाएगा। पिछले दिनों तेल के दामों में बढ़ोतरी के कारण कोलकाता के साथ-साथ गुवाहाटी व बिहार के लिए जाने वाली ट्रकों के किराए में वृद्धि की गई थी। शुक्रवार को तेल के दाम घटने के बाद भी किराया घटाने के आसार कम हैं। वाराणसी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेपी तिवारी बताया कि पेट्रोल व डीजल में 10 से 11 रुपये का उछाल पिछले कुछ महीनों में आया। कुल मिलाकर पांच रुपये भी नहीं घटाए गए। माल ढुलाई का शुल्क अगर कम करते हैं तो ट्रांसपोर्टरों को घाटा होगा। हालांकि इस संबंध में कोई फैसला ट्रांसपोर्टर बैठक कर एक-दो दिन में करेंगे।
ऑटो चालक भी किराया कम करने पर राजी नहीं दिख रहे। चांदपुर से कैंट के बीच कुछ महीने पहले ही किराया 10 से बढ़ाकर 15 रुपये किया गया था। वहीं चांदपुर से चितईपुर का किराया भी पांच रुपये बढ़ा दिया गया। ऑटो चालक अजीत कुमार ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के दाम में जिस हिसाब से वृद्धि हुई, उस हिसाब से कमी नहीं की गई। अगर किराया कम किया तो उन्हें घाटा होगा। यही कहना था कैंट से मंडुवाडीह चलने वाले राजेश बिंद का।
आम लोगों में नाराजगी
सोनारपुरा की रहने वाली सना आफरीन ने बताया कि पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ने के नाम पर किराया ज्यादा लिया जाने लगता है, पर जब घटाने की बात आती है तो तरह-तरह के तर्क दिए जाते हैं। छोटी पियरी के आशुतोष सिंह ने बताया कि प्रशासन को हस्तक्षेप कर आम आदमी की राहत दिलवानी चाहिए।