वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ की ओर से समिति कक्ष में आयोजित ‘सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की भूमिका’ विषयक कार्यशाला में शिरकत करने पहुंचीं मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को परिसर में प्रवेश से नहीं दिया गया। इस पर विद्यापीठ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया। नारेबाजी करने वालों की पुलिस ने पिटाई भी की। विद्यापीठ प्रशासन का कहना था कि न तो आयोजन की पूर्व अनुमति ली गई और न ही तीस्ता सीतलवाड़ के आगमन की सूचना दी गई। जबकि, तीस्ता सीतलवाड़ ने अनुमति के बावजूद प्रवेश से रोकने और जोर-जबरदस्ती करने का आरोप लगाया है।
काशी विद्यापीठ छात्रसंघ की ओर से समिति कक्ष में ‘सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की भूमिका’ विषयक कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसके लिए तीन दिन पहले अनुमति मांगी गई थी। विद्यापीठ प्रशासन का कहना है कि तीस्ता सीतलवाड़ के आगमन की सूचना नहीं दी गई थी। सोमवार की शाम सोशल मीडिया पर सीतलवाड़ के आने की सूचनाएं चलने लगी तो प्रशासन ने छात्रसंघ पदाधिकारियों से वार्ता की। विद्यापीठ प्रशासन का दावा है कि परीक्षाओं के आयोजन के चलते सुबह भी छात्रसंघ पदाधिकारियों से वार्ता हुई और कार्यक्रम न करने की बात तय हुई। इसके बावजूद तीस्ता सीतलवाड़ और छात्रसंघ के कुछ पदाधिकारी, समर्थक मलदहिया गेट से अंदर घुस गए। लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास के समीप उन्हें पुलिस और विद्यापीठ के सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। इसी पर तीस्ता सीतलवाड़ और उनके साथ आए लोग नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। उधर, अखिल भारतीय विद्याथी परिषद ने तीस्ता सीतलवाड़ का विरोध किया। आखिरकार तीस्ता सीतलवाड़ को कार्यशाला की इजाजत नहीं मिली। फोन पर हुई वार्ता में तीस्ता सीतलवाड़ ने बताया कि अनुमति के बावजूद भी उन्हें वर्कशॉप नहीं करने दिया गया। विद्यापीठ परिसर चारों तरफ बीजेपी के झंडे लहरा रहे हैं और सामाजिक और छात्रों के कार्यक्रम को करने से मना किया जा रहा है। कैंपस में पुलिस मनमानी कर रही है।