वाराणसी। छायावाद के चार स्तंभों में से एक महाकवि जयशंकर प्रसाद की कामायनी सहित अन्य बेशकीमती कृतियों की पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। चोरी सहित अन्य आरोपों में भाई महाशंकर प्रसाद द्वारा चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराए जाने की जानकारी मिलने पर रविवार को यह बातें महाकवि के पोते आनंद शंकर ने कहीं। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों को सहेज कर रखा गया है और यदि उन्हें धरोहर के तौर पर सरकार रखने को तैयार हो तो वो देने को तैयार हैं। बताया कि जमीन विवाद की रंजिश में उनके भाई अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। इस संबंध में सोमवार को एसएसपी से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
सरायगोवर्धन निवासी महाशंकर प्रसाद की तहरीर पर न्यायालय के आदेश से चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि महाशंकर के भाई आनंद शंकर और उनके बेटों विजय शंकर व रवि शंकर ने महाकवि की बेशकीमती पांडुलिपियां और परिधान चोरीछिपे बेच दिया है। महाशंकर का कहना है कि महाकवि की पांडुलिपियों, परिधानों सहित उनसे जुड़ी अन्य बेशकीमती सामग्रियों को सहेज कर रखने के लिए प्रसाद न्यास की स्थापना की गई थी और वो इसके प्रमुख न्यासी हैं। उधर, इस संबंध में आनंद शंकर ने कहा कि पांडुलिपियां और परिधान सब कुछ घर में ही मौजूद है। कोई अनियमितता जैसी बात नहीं है और सब कुछ सुरक्षित है।