वाराणसी। बीएचयृ दृश्य कला संकाय के अहिवासी कला दीर्घा में सजी एक से बढ़कर एक कलाकृतियां कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। कनाडा की चित्रकार मार्गरेट लार्सन ने अपनी कृतियों में उन्हें जगह दी जिन्हें अब तक कोई मेडल तो नहीं मिला लेकिन वो उसके हकदार हैं। इसमें किसान को भी जगह मिली और उस महिला को भी जो घर के बाहर की जिम्मेदारी भले न उठा रही है लेकिन एक परिवार को बखूबी चला रही है। उसे भी जगह मिली जिसने अपनी बहन की याद में 19 साल से कॉफी नहीं पी, उसे भी जिसेे दृढ़ता से मद्यपान छोड़े 17 साल हो गए।
मार्गरेट ने ऐसे 35 लोगाें को अपनी प्रदर्शनी में जगह दी। ‘डायलॉग’ विषयक इस 11 दिवसीय प्रदर्शनी में बीएचयू के पेंटिंग विभाग के सुरेश के नायर के म्यूरल आर्ट को भी लोगाें ने खूब सराहा। बाघा बार्डर से लेकर नेपाल में बनाई गई उनके म्यूरल आर्ट के छायाचित्र इस प्रदर्शनी की शान बने। मार्गरेट ने बताया कि इस फोटो प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य हर आम इंसान के अंदर की खास प्रतिभा को सम्मानित करना है। मार्गरेट के मुताबिक पदक सिर्फ स्वर्ण, रजत या कांस्य धातु के ही नहीं किसी भी सामग्री व रूप में हो सकते हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन 39 जीटीसी के कर्नल रघुनाथन नायर ने किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर कला संकाय प्रमुख प्रो. डीपी मोहंती रहे।