वाराणसी। संकटमोचन मंदिर में शुरु श्रीरामचरित मानस नवाह्न पाठ यज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को भगवान राम के जन्मोत्सव का वर्णन मानस के दोहों व चौपाईयों के माध्यम से किया गया। भय प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी की चौपाईयों से मंदिर गंज उठा। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने मानस पोथी, व्यास पीठ, और व्यास डा. राधाकांत ओझा का पूजन किया।
111 ब्राह्मणेां का पूजन अर्चन कर पाठ की शुरुआत की। दूसरे दिन पाठ में भगवान राम के जन्मोत्सव का वर्णय हुआ। इस मौके पर विवाह पंचमी पर मानस सम्मेलन में बांदा चित्रकूट से आए मानस मर्मज्ञ आचार्य यज्ञेश मिश्र ने कहा कि सनातन धर्म में विवाह एक संस्कार है। अन्य धर्मों में विवाह मात्र समझौता है। भगवान राम ने तीन पद्धतियों से विवाह किया। पुष्प वाटिका में प्रेम विवाह, धनुष भंग कर प्रण विवाह या स्वयंवर विवाह, कुल परंपरानुसार भांवर या सिंदूर दान करके रीति विवाह किया।
प्रतापगढ़ के दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि शाश्वत सुख की प्राप्ति भगवान राम के चरणों में है। उनके चरणों में अनुराग श्रीराम चरित मानस के माध्यम से आता है। राजेश्वर त्रिपाठी, मनोज मिश्र, प्रभाकर त्रिपाठी, हीरालाल द्विवेदी ने मानस का वर्णन किया। कार्यक्रम का संचालन राघवेंद्र पांडेय व धन्यवाद ज्ञापन रामयश मिश्र ने किया।