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प्रभाती रागों के सफर के तीन साल पूरे

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वाराणसी। अस्सी घाट पर सुबह -ए -बनारस के मंच पर प्रभाती रागों की संगीत यात्रा के तीन वर्ष शुक्रवार को पूरे हो गए। इस मौके को पं सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा के तारों को छेड़कर खास बना दिया। पद्मभूषण पं विश्वमोहन भट्ट के पुत्र सलिल ने राग नट भैरव की अवतारणा की।
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सुबह पांच बजे अस्सी घाट पर पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के वेदमंत्रोच्चार के साथ जहां विश्व कल्याण की कामना से यज्ञ आरंभ हुआ, वहीं दूसरी ओर घंट-घड़ियाल के साथ बटुकों ने गंगा आरती की। इसके बाद सलिल भट्ट ने मंच संभाला। उन्होंने राग नट भैरव में आलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित एकताल में निबद्व गत की प्रस्तुति की। फिर मध्यलय तीनताल में निबद्ध गत की अवतारणा कर तालियां बटोरी। द्रुत तीन ताल में निबद्ध गत बजाकर उन्होंने विराम लिया।
इस दौरान राग रूप में विविध लयकारियों के समावेश के साथ सलिल ने स्वरों के समन्वय से वाहवाही लूटी। कलाकारों को मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण और उनकी पत्नी शीला गोकर्ण ने सम्मानित किया। मंडलायुक्त ने सुबह -ए -बनारस में योगदान के लिए संगीतज्ञ पं देवाशीष डे, आचार्य नंदिता शास्त्री, बैंक ऑफ बडौदा के डीजीएम प्रदीप काला, सतीश मिश्र, किशन जालान, मंजू मिश्रा, योग प्रशिक्षिका डॉ पूर्णिमा मिश्रा और संचालक डॉ प्रीतेश आचार्य को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। सुबह -ए -बनारस के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य ने इस संगीत यात्रा पर रोशनी डाली। धन्यवाद ज्ञापन किया डॉ रत्नेश वर्मा ने।
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