वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के बाहर सोमवार को दिल्ली के ‘जंतर-मंतर’ जैसे हालात नजर आए। अलग-अलग पांच स्थानों पर धरना और नारेबाजी के बीच हर खेमा अपने हक-अधिकार की आवाज बुलंद करता रहा। जैसे यह विश्वविद्यालय परिसर न होकर धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित सार्वजनिक स्थल हो।
विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं के खिलाफ दो छात्र गुटों के अलावा शिक्षक और कर्मचारी तीन दिनों से धरने पर हैं। अब अधिकारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय कार्यालय पहुंचे तो धरनारत शिक्षकों-कर्मचारियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसे लेकर उनकी कुलपति से नोकझोंक भी हुई। विरोध के बाद कुलपति वापस चले गए।
छात्रों का एक गुट छात्र समस्याओं के समाधान के लिए धरने पर है, वहीं दूसरा गुट कुलसचिव को कार्यमुक्त करने और छात्रावास सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मोर्चा खोले हुए है। शिक्षक इस आरोप को लेकर धरने पर हैं कि कुलपति द्वारा बिना परिनियम में संशोधन के नियुक्ति की जा रही है। इसकी शिकायत राजभवन तक भी की है। कर्मचारियाें की नाराजगी वेतन का भुगतान न होने और प्रमोशन आदि में विसंगतियों को लेकर है। जबकि सोमवार से धरने पर बैठे अधिकारी व्यवस्थागत खामियों से विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित होने से नाराज हैं। मुंह पर काली पट्टी लगाकर धरने पर बैठे सुरक्षाधिकारी, संपत्ति अधिकारी, संगणक प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों ने मांग की कि जल्द से जल्द परिसर का माहौल सामान्य किया जाए और इसके लिए कुलपति तत्काल कदम उठाएं। पांचों ग्रुपों ने मंगलवार को भी धरना जारी रखने का एलान किया। चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर कुलपति प्रभावी कदम नहीं उठाते तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।