ज्ञानपुर। तालाब को कृषि योग्य भूमि बनाकर पट्टा करने के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। 14 लोगों को फर्जी तरीके से आवंटित किए गए कृषि पट्टे पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच हुई तो सभी पट्टा तालाब की भूमि पर पाए गए। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के बाद एसडीएम ने सभी 14 पट्टों को निरस्त कर आख्या डीएम को भेज दी।
तालाब, चारागाह और सरकारी भूमि पर से अवैध कब्जा हटाने के लिए शासन से लेकर प्रशासन तक भले ही तमाम दावे कर लें, लेकिन हकीकत इससे इतर है। हलका लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार की कृपा से व्यापक स्तर पर धांधली की जा रही है। तालाब को कृषि योग्य भूमि बना दिया जाता है तो चारागाह को परती दर्शाया जाता है। ऐसा ही एक मामला अभोली के हरिकरनपुर गांव में सामने आया है। यहां 1996 में राजस्व विभाग की कृपा से तालाब की जमीन को कृषि योग्य भूमि दिखाकर 14 लोगों को कृषि पट्टा आवंटित कर दिया गया था। मामला तब खुला जब करीब दो दशक बाद कुछ लोग मुखर हुए।
गांव के वंशराज पुत्र जयनाथ ने जनता दर्शन में डीएम कार्यालय में शिकायत की। मामला भदोही तहसील का होने से डीएम ने एसडीएम भदोही आशीष कुमार को जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने तहसीलदार भदोही से जांच कराई। जांच के दौरान पाया गया कि हरिकरनपुर में गाटा संख्या 431 रकबा 1.594 हेक्टेयर राजस्व अभिलेख में तालाब के रूप में दर्ज है। वर्ष 1996 में 14 लोगों को उक्त भूखंड में से 0.882 हेक्टेयर भाग का कृषि आवंटन कर दिया गया। वर्तमान में भी वह रकबा तालाब में ही अंकित है। तालाब भूमि पर किसी भी तरह का कृषि आवंटन नियमानुसार नहीं किया जा सकता। तहसीलदार की रिपोर्ट पर एसडीएम ने बालमुकुंद पुत्र वंशीधर, हरिश्चंद्र पुत्र दिलगू, बसंत लाल पुत्र राम सनेही, चिंतामणि पुत्र मुरली, छविराम पुत्र सहदेव, रामआसरे पुत्र रामलाल, दुलारे पुत्र रामलाल, सिधई पुत्र मुरली समेत 14 लोगों का कृषि आवंटन पट्टा निरस्त कर दिया।
एसडीएम आशीष कुमार ने कहा कि फर्जी तरीके से पट्टा आवंटन की शिकायत मिली थी, जो जांच में सही पाई गई। सभी 14 पट्टे निरस्त कर डीएम को कार्रवाई को प्रेषित किया गया है। तहसील में जहां भी ऐसी गड़बड़ी की गई है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।