ये है पूरा मामला
2 सितंबर 2005 को जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग ज्ञानवापी मस्जिद की ओर जा रहे थे, जबकि मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी उसी मार्ग से आवागमन कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत छत्ताद्वार पर तैनात पुलिसकर्मी सभी व्यक्तियों की जांच कर उन्हें प्रवेश दे रहे थे।
इसी दौरान मौलाना बातिन वहां पहुंचे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनकी भी तलाशी लिए जाने पर उनके साथ मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और नाराजगी व्यक्त की। आरोप है कि कुछ नमाजी इस घटना से उत्तेजित हो गए और पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कुछ लोग वहां से वापस ज्ञानवापी क्रॉसिंग की ओर चले गए, जहां पुलिस और प्रशासन के विरोध में नारेबाजी शुरू हो गई।
मौलाना बातिन एक दुकान पर बैठ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक चौक प्रदीप कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके अलावा प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी वहां पहुंचे और मौलाना बातिन तथा अन्य लोगों से वार्ता का प्रयास किया।
इसी दौरान राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू तिवारी का नाम सामने आया। आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अलावा किसी अन्य अधिकारी से कोई बातचीत नहीं की जाएगी तथा मौलाना बातिन को भी बातचीत करने से रोका। रवैये के कारण वहां मौजूद लोगों में उत्तेजना बढ़ी और वार्ता प्रभावित हुई।
बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई। प्रशासन ने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मौलाना बातिन नमाज अदा करने के लिए तैयार हो गए। दोपहर लगभग तीन बजे नमाज शुरू हुई और निर्धारित समय पर संपन्न भी हो गई।
अभियोजन के अनुसार नमाज समाप्त होने के बाद हालात फिर बिगड़ गए। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग ज्ञानवापी क्रॉसिंग की ओर एकत्रित हो गए और नारेबाजी करते हुए पुलिस पोस्ट तथा वहां लगे उपकरणों को नुकसान पहुंचाने लगे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भीड़ को कई बार चेतावनी दी गई कि उनका जमावड़ा अवैध है और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद भीड़ नहीं मानी और पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। आरोप है कि इस दौरान सरकारी संपत्ति, वाहनों और अन्य सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मंदिर और मस्जिद दोनों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया तथा क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।