वाराणसी। बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह को हटाने की मांग को लेकर केंद्रीय कार्यालय पर 18 दिन से चल रहा धरना सोमवार को डीएम के हस्तक्षेप के बाद खत्म हो गया। इस दौरान छात्रों द्वारा प्रो. रोयाना पर लगाए गए आरोपों की जांच एक महीने के भीतर पूरी करने, नर्सिंग छात्रों के खिलाफ लंका थाने में दर्ज मुकदमे में कोई कार्रवाई न होने, पूर्व में निलंबित, निष्कासित छात्रों के मामले में दूसरी कमेटी का गठन करने का फैसला लिया गया।
विश्वविद्यालय में चीफ प्रॉक्टर को हटाए जाने की मांग को लेकर छात्र पिछले 18 दिन से केंद्रीय कार्यालय पर धरना दे रहे थे। इस दौरान कुलपति के निर्देश पर दो बार शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल बातचीत करने गया और एक बार कुलपति से भी छात्रों की बातचीत हुई। इस बीच छात्र कार्रवाई होने तक धरना करने पर अड़े रहे। पांच दिन पहले भी डीएम सुरेंद्र सिंह विश्वविद्यालय पहुंचे थे और कुलपति से बात कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। सोमवार शाम करीब चार बजे डीएम फिर विश्वविद्यालय पहुंचे और छात्रों के साथ ही कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत कर मांगों पर कार्रवाई की बात कही। छात्र अधिष्ठाता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में छात्रों की मांगों पर कार्रवाई की जानकारी दी। धरनारत छात्रों ने बताया कि यदि तय समय के भीतर मांगें नहीं मानी गई तो फिर धरना-प्रदर्शन को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
ये लिए गए निर्णय
-चीफ प्रॉक्टर प्रकरण में गठित जांच समिति एक माह के भीतर जांच पूरी कर लेगी।
-समिति में आचार्य एससी लाखोटिया को भी शामिल किया जाएगा।
-चीफ प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा नर्सिंग छात्रों के खिलाफ लंका थाने में दर्ज मुकदमे में कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाएगी।
-निलंबित/निष्कासित छात्रों के मामले में एक अन्य समिति गठित की जाएगी। जो छात्रों के पक्ष पर व्यक्तिगत तौर पर पुर्नविचार कर तय समय के भीतर जांच कर रिपोर्ट देगी। छात्र समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।