वाराणसी। लगातार गिर रहे भूजल स्तर को रोकने के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब मंदिर से निकलने वाले जल का सिंचाई सहित अन्य कार्यों में उपयोग होगा। इसके लिए छह महीने में मंदिर परिसर में रेन वाटर हार्वेेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में रोजाना हजारों लीटर जल और दूध अर्पित करते हैं। अब तक इसका कोई उपयोग नहीं होता था। यह नालियों में बह जाता था। अब आईआईटी दिल्ली के सहयोग से काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से इसका इस्तेमाल भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने में करेगा। मंदिर के अधिकारियों की मानें तो मंदिर में चढ़ने वाले जल और दूध को अलग-अलग कर इस्तेमाल करने की भी कार्ययोजना बनाई गई है।
भूगर्भ जल विभाग के मुताबिक, काशी में 23 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। जिले के अराजी लाइन और काशी विद्यापीठ ब्लाक को डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। यही नहीं अस्सी से लेकर राजघाट तक गंगा किनारे के मोहल्लों में भी पानी का संकट है। आईआईटियन प्रो. पीएस दूबे मानते हैं कि न्यास परिषद की पहल से काशी के जलस्तर में सुधार की कोशिश के सकारात्मक परिणाम आएंगे।