ज्ञानपुर। यातायात पखवारा पुलिस और परिवहन विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। महज हेलमेट चेकिंग और वाहनों का चालान कर वसली तक यह अभियान सिमट कर रह गया। युवाओं, किशोरों और आमजन को सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने लिए न तो स्कूल-कॉलेजों में गोष्ठियां कराई गईं और न रैलियां निकाली गईं। आम दिनों की तरह पूरे पखवारे पर लोग जगह-जगह नो पार्किंग में बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े करते रहे और अतिक्रमण के चलते जाम की समस्या भी बरकरार रही।
तमाम प्रयासों के बाद भी सड़कों पर सुरक्षित यातायात को लेकर संजीदगी नहीं देखी जा रही। यातायात माह और पखवारे में यातायात एवं परिवहन विभाग की ओर से गाहे-बगाहे अभियान चलाया जाता है। इस बार यातायात पखवारा उदासीनता की भेंट चढ़ रहा है। एक दो दिन अभियान चलाकर जागरूकता अभियान की इतिश्री कर ली गई। यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने की खातिर जागरूकता के लिए न तो गोष्ठी हुई ना ही रैली। सड़कों पर हेलमेट चेकिंग और चालान के नाम पर पुलिस ने दो दिन कागजी कोरम जरूर पूरा किया। खानापूर्ति से यातायात पखवारा लक्ष्य से भटक चुका है।
सड़कों पर युवा और किशोर बिना हेलमेट लगाए और तीन सवारियां बैठा कर स्कूटर या बाइक से फर्राटा भरते हैं। हेलमेट के बिना जान गंवाने वाले तमाम हादसे सामने आने के बाद भी वाहन चालकों में इसकी अहमियत को लेकर गंभीरता नहीं दिखती। गत रविवार को दुर्गागंज में बाइक सवार छात्रों की टक्कर से एक युवक जहां जान चली गई, वहीं बाइक पर सवार एक अन्य छात्र सिर में गंभीर चोट लगने के कारण कोमा में चला गया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो अगर बाइक सवारों ने हेलमेट लगाया होता तो शायद इतनी गंभीर हालत न होती। गत दिनों चौरी में भी कंधिया फाटक के पास पोल से टकराकर गड्ढे में गिरने बाइक सवार की हुई मौत के मामले में भी सिर में चोट मौत की वजह बताई गई। बाइक सवार ने अगर हेलमेट लगाया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। इसी तरह ज्ञानपुर के हरिहरनाथ मंदिर, राजा पार्क, गोपीगंज के विभिन्न इलाकों में बेतरतीब वाहनों के खड़े होने से आए दिन लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है।