वाराणसी। शिवरात्रि संगीत महोत्सव की तीसरी और अंतिम निशा अपने आप में बेहद खास रही। एक तरफ आधुनिक स्लाइड गिटार की रोम-रोम झंकृत कर देने वाली धुन तो दूसरी तरफ निर्गुण भक्ति की रसधार में डूबे कबीर के सूफियाना भजन रहे। सेठ किशोरी लाल जालान सेवा ट्रस्ट के संयोजन में दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय शिवरात्रि संगीत महोत्सव के अंतिम दिन बुधवार को पाश्चात्य और भारतीय लोक कला संस्कृति का अद्वितीय संगम देखने को मिला।
महोत्सव की पहली प्रस्तुति विदुषी कलाकार डॉ. कमला शंकर के स्वनिर्मित शंकर स्लाइड गिटार की रही। उन्होंने राग रागेश्री में निबद्ध अलाप जोड़ झाला, इसके बाद विलंबित तीन ताल में रचना प्रस्तुत की। उसके बाद द्रुत झाला फिर अंत में एक भटियाली धुन प्रस्तुत किया तो समूचा विद्यालय प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके साथ तबले पर पं. पुंडलिक कृष्ण भागवत और सहयोगी गिटार पर निर्मल सैनी ने संगत की। महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति उज्जैन, मध्य प्रदेश से आए पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया के भजन की रही। उन्होंने मानव समाज को एकता के सूत्र में पिरोने वाले तथा प्रकृति सवंर्धन व सरंक्षण पर आधारित कबीर वाणी को भजन स्वरूप में प्रस्तुत किया। गुरू वंदना से गायन की शुरूआत करते हुए उन्होंने भजन ‘कोई सुनता है गुरू ज्ञानी’ ‘हम परदेशी पंछी साधो’ ‘जरा हलके गाड़ी हॉकों मेरे राम गाड़ी वाले’ ‘गुरू बिन ज्ञान न पाओ’ जैसे भजनो की ओजपूर्ण प्रस्तुति से महौल को भक्तिमय बना दिया। ‘मतकर माया को अहंकार’ और फिर ‘चादर झिनी रे’ से गायन को विराम दिया। उनके साथ सह गायक विजय टिपानियाए ढ़ोलक पर अजय टिपानिया, हारमोनियम पर धर्मेंद्र, वायलिन पर देवनारायण तथा टिमकी पर मनोज ने संगत की। इससे पूर्व निशा का आरंभ प्रख्यात कथावाचक संत रमेश भाई ओझा और अनुभवानन्द ने किया। अतिथियों का स्वागत कृष्ण कुमार जालान तथा भगीरथ जालान ने किया। महोत्सव में पद्म भूषण पं. छन्नूलाल मिश्रा, सत्यनारायण झुनझुनवाला आदि लोग उपस्थित रहे। संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।