सीतामढ़ी। जगत जननी माता सीता के जयंती महोत्सव के अवसर पर उनके दरबार सीतामढ़ी में गुरुवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ गरीब और बेसहारा कन्याओं के हाथ पीले किए गए। श्री सीता समाहित स्थल ट्रस्ट की ओर से आयोजित सामूहिक विवाहोत्सव में 29 जोड़ों ने विधि विधान से अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेकर जीवन भर एक-दूसरे के साथ रहने का संकल्प लिया।
सुबह भव्य कलश यात्रा के साथ सामूहिक विवाहोत्सव की शुरुआत हुई। सीता मंदिर में कलश पूजन हुआ और 9:30 बजे गाजे-बाजे के साथ बारात निकली। आगे-आगे कलश लिए महिलाएं और उनके पीछे आकर्षक परिधानों में सजे दूल्हों के साथ सैकड़ों बाराती नाचते-झूमते विवाह स्थल के लिए निकले तो सड़क के दोनों ओर भीड़ लग गई। 10 बजे बारात पं. कन्हैयालाल पुंज बहुउद्देशीय हॉल में पहुंची, जहां श्री सीता समाहित स्थल ट्रस्ट के प्रधान ट्रस्टी उद्योगपति पं. सत्यनारायण प्रकाश पुंज, उनकी पत्नी इंदुरानी पुंज के अलावा डॉ. राजकुमारी और दिल्ली से आए मेहमानों ने बारातियों का स्वागत किया। इसके बाद सजी-धजी दुल्हनों और दूल्हों को स्टेज पर बैठाया गया। दयावंती पुंज मॉडल स्कूल की शिक्षिकाओं ने बारी-बारी से सभी जोड़ों का जयमाल कार्यक्रम संपन्न कराया तो तालियों की गड़गड़ाहट हॉल गूंजने लगा। पास में ही बनी तीन वेदियों पर अलग-अलग जोड़े बैठाए गए। उसके बाद पंडित बालक शुक्ला शास्त्री के आचार्यत्व में पं. सत्यदेव मिश्रा, अरविंद मिश्र, राजेंद्र मिश्र, जितेंद्र उपाध्याय, रविंद्र जी, रामकृष्णन ने विधि विधान से विवाह संपन्न कराया। इस बीच महिलाओं के मंगल गीतों से माहौल खुशनुमा हो गया।