वाराणसी। लोक आस्था का पर्व मकरसंक्रांति पर गंगा स्नान करने के लिए रविवार को आस्थावानों की भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज एवं आसपास के गांव से महिलाओं और पुरुषों का रेला सुबह से ही घाटों पर पहुंचने लगा था। प्रमुख घाटों पर स्नार्थियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग कराई गई थी। हालांकि मकर संक्रांति का पुण्यकाल रविवार की शाम आठ बजे से आरंभ होगा और सोमवार को दोपहर 12 बजे तक रहेगा।
दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, पंचगंगा घाट, राजघाट, केदारघाट, आदिकेशव घाट, अस्सीघाट, सामनेघाट आदि प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए भोर से देर शाम तक भीड़भाड़ रही। लोग नाव से गंगा पार भी पहुंचे थे। धूप निकलने की वजह से युवक व युवतियां भी काफी संख्या में गंगा तट पर पहुंचे थे। इधर गंगा घाटों पर जाने वाले रास्तों पर भीड़ रही। स्नान के बाद लोगों ने तिल, गुड़ से बनी सामग्री, अनाज और खिचड़ी का दान दिया। उधर दशाश्वमेध मार्ग स्थित खिचड़ी बाबा मंदिर पर विभन्नि श्रद्धांलुओं की ओर से खिचड़ी बांटी गई।
काशी पंचांग के अनुसार रविवार की रात आठ बजे से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। मगर परंपरानुसार 14 जनवरी को आस्थावान गंगा स्नान के लिए काशी पहुंचे थे। दूर-दराज से लोग शनिवार की रात में ही यहां आए गए थे। कुछ होटलों, रैन बसेरों एवं घाटों के आसपास ठहरे थे। भोर में ही स्नान के लिए घाट पहुंच गए और नहान शुरू हो गया। मगर सूर्यदेव का दर्शन सुबह 10 बजे के बाद ही हुआ। इलाहाबाद में माघ मेले में स्नान के बाद लौट रहे लोगों ने काशी में गंगा स्नान किया। स्नानार्थियों की सेवा के लिए कई संस्थाओं ने शिविर लगाकर उनको चाय-नाश्ता कराया। गंगा स्नान के करने आए दूर-दराज के लोग ढोल व झाल-मजीरा संग भजन कीर्तन करते रहे। महाराष्ट्र से आई सैकड़ों भक्तों की टोलियां भजन कीर्तन कर रहे थे। राजस्थान, पंजाब, दक्षिण भारतीय आदि प्रांतों के लोग स्नान, दान करने पहुंचे थे। नेपाल से भी भक्तों का जत्था आया था।