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करखियांव एग्रो पार्क मामले में आरएम हाईकोर्ट में तलब

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) करखियांव के एग्रो पार्क में अमूल समेत दो बड़ी संस्थाओं को अभी तक कब्जा नहीं दिला पाई है। इसके चलते पीएम नरेंद्र मोदी का सपना उसी जिले में पूरा नहीं हो पा रहा है जहां से वह संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को साक्ष्य के साथ तलब किया है।
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शासन के निर्देश पर यूपीएसआईडीसी ने वर्ष 2011 में बड़ागांव के करखियांव में फूड एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट खोलने के लिए सीबीके चैरिटेबल ट्रस्ट को करीब 61 एकड़ और वर्ष 2015 में अमूल को 30 एकड़ जमीन आवंटित की। दोनों संस्थाओं ने आवंटन से पूर्व लीज की धनराशि जमा कर दी लेकिन जब कब्जे की बात आई तो विभाग के अधिकारी आनाकानी करने लगे। शासन का दबाव पड़ने पर दो बार यूपीएसआईडीसी के नुमाइंदों ने मौके पर कब्जा दिलाने का प्रयास किया लेकिन किसानों के प्रबल विरोध के चलते पीछे हट गए।
इसी मामले में सीबीके चैरिटेबल ट्रस्ट ने जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। सोमवार को इस प्रकरण में हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अदालत में सुनवाई हुई तो विभाग के अधिकारी साक्ष्य पेश नहीं कर सके। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को तलब किया है। साथ ही पुख्ता साक्ष्य लाने का निर्देश दिया है।
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इस संबंध में यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक सुबोध कुमार सक्सेना ने दावा किया कि अमूल और ट्रस्ट पैसा जमा नहीं कर रहे हैं जिसके चलते कब्जा नहीं दिया जा सका है। किसानों के प्रबल विरोध के मामले में उन्होंने गोल-मोल जवाब दिया। कहा कि वह गुरुवार को कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।
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