वाराणसी। निकाय चुनाव के प्रचार अभियान का शोर थमने के बाद अब भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा ने डोर टू डोर जनसंपर्क में अपनी ताकत झोंक दी है। निर्णायक दौर में हर कोई बाजी मारने की जीतोड़ कोशिश में है। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते यहां के निकाय चुनाव पर पार्टियों के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व तक की नजरें हैं। 26 नवंबर को होने वाले मतदान में नगर निगम के 10 लाख 84 हजार 821 मतदाता अपना महापौर चुनेंगे। 89 वार्डों में जोरआजमाइश में जुटे 608 पार्षद प्रत्याशियों की किस्मत का भी फैसला होगा।
महापौर पद पर लड़ाई इस बार बेहद दिलचस्प है। भाजपा की प्रत्याशी मृदुला जायसवाल वाराणसी से तीन बार सांसद रहे चुके स्वर्गीय शंकर प्रसाद जायसवाल की बहू हैं तो कांग्रेस की शालिनी यादव राज्यसभा के पूर्व उपसभापति श्यामलाल यादव की पुत्रवधू हैं। सपा भी शहर के नामी बिल्डर की पत्नी साधना गुप्ता पर दांव आजमा रही है तो बसपा ने पेशे से वकील सुधा चौरसिया को मैदान में उतारकर अपना जोर लगाया है। सूबे की इस सबसे हाई प्रोफाइल सीट पर कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं, शहर के 89 वार्डों से सियासी दलों और निर्दल प्रत्याशी के तौर पर कुल 608 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे है। रविवार को काशी की जनता इनके भाग्य का फैसला करेगी। एक दिसंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित होंगे। निकाय चुनाव में कुल 614 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 10 लाख 84 हजार 821 वोटर करेंगे। इन वोटरों में पुरुषों की संख्या 5 लाख 91 हजार 434 है जबकि महिलाओं की संख्या 4 लाख 93 हजार 487 है।