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पूरी रेकी के बाद दिया वारदात को अंजाम

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वाराणसी। कैंट रेलवे स्टेशन के सामने परेड कोठी क्षेत्र में होटलों और ट्रेवल एजेंसियों की भरमार है। मंगलवार की सुबह कमल अरोड़ा की वनस्पति घी और टूथपेस्ट एवं ब्रश की एजेंसी के मुनीम अशोक गुप्ता की हत्या और लूट की जानकारी होते ही घटनास्थल पर इलाकाई लोगों की भीड़ जुट गई। जिस तरह वारदात को अंजाम दिया गया, उससे पुलिस को शक है कि किसी करीबी के जरिए सटीक मुखबिरी हुई। वारदात से पहले बदमाशों ने पूरी रेकी की। वे गोदाम और वहां काम करने वालों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। वारदात के लिए जिस तरह आधी रात के बाद का वक्त चुना गया, उससे भी पुलिस को आशंका है कि बदमाश पहले भी वहां आ चुके थे।
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मुनीम के अकेले कमरे में होने की बात बदमाशों को पता थी। मुनीम अशोक गुप्ता की हत्या और लूट करने वाले बदमाश तकनीकी जानकार भी थे। इसी वजह से उन्होंने जब सीसीटीवी कैमरा लगा देखा तो छुटभैये बदमाशों की तरह तोड़फोड़ नहीं की बल्कि सीधे उसका डिजिटल वीडियो रिकार्डर (डीवीआर) ही उठा ले गए। इसके चलते बदमाशों का पता लगाने के लिए पुलिस को अगल-अगल के होटलों की सीसीटीवी फुटेज खंगालनी पड़ रही है। वहीं, अशोक के बारे में कमल अरोड़ा ने बताया कि वे बीते तीन साल से उनके यहां काम कर रहे थे और उसके पहले भी उनके यहां वह कर्मचारी रहे। कमल ने बताया कि अशोक बेहद मिलनसार और मृदुभाषी थे। पैर टूटने के बावजूद उन्हें काम की चिंता सताती रहती थी और घर आने-जाने में दिक्कत देखकर एजेंसी में ही रहने लगे थे। एजेंसी मैनेजर राकेश ने बताया कि अशोक समय के बेहद पाबंद और विवादों से दूर रहने वाले थे। बता दें कि इसी एजेंसी के गार्ड से तीन साल पहले भी लूट का असफल प्रयास हुआ था। इसके पहले जब यहां लाटरी का खेल होता था तब भी चोरी जैसी बातें सामने आती रहती थी। बाहर से आकर इस इलाके के होटलों में ठहरे सैलानियों और श्रद्धालुओं को घटना की जानकारी हुई तो वे भी सहम गए। वारदात की चर्चा इलाके की चाय और पान की दूकानोें पर देर रात तक होती रही और बदमाशोें के संबंध में लोग कयास लगाते रहे।

कुछ सवाल जिनका जवाब खोज रही पुलिस

- एजेंसी का चैनल गेट गॉर्ड ने खुला देखा तो ऊपर रहने वाले अशोक की बजाय गायघाट निवासी राकेश को क्यों फोन किया
- राकेश के आने तक गार्ड अंदर जाने की बजाय बाहर इंतजार क्यों करता रहा
- बाहर लगे ताले की चाबी अशोक के पास रहती थी तो गेट आखिरकार कैसे खुला
- अशोक के शव के पास आखिरकार किसने लिखा ‘विकाश’ और इसका रहस्य क्या है।

चाकू, चाबी और पेचकश से गोदा गया था अशोक को
वाराणसी। परेड कोठी क्षेत्र में हत्या और लूट की घटना की जानकारी पाकर फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम और डॉग स्क्वॉड भी मौके पर पहुंचा। डॉग स्क्वॉयड एजेंसी से थोड़ा आगे जाकर रुक गया और वापस लौट आया। पुलिस के अनुसार ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे अशोक के शरीर को चाकू, चाबी और पेचकश से गोदा गया है। हालांकि वारदात में प्रयुक्त कोई नुकीला हथियार मौके से बरामद नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार बदमाशों ने अशोक से लॉकर की चाबी मांगी होगी। न देने पर दोनों के बीच झड़प और हाथापाई हुई होगी। इसके बाद बदमाश अशोक की हत्या कर जो हाथ लगा होगा उसे लेकर भाग निकले होंगे। अशोक की हत्या के संबंध में एजेंसी के मैनेजर राकेश ने सिगरा थाने पर तहरीर दी है। पुलिस अज्ञात के खिलाफ हत्या, लूट सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी है।
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तीन दिन बैंक बंद होने के कारण हो गया था ज्यादा कैश
वाराणसी। मैनेजर राकेश ने बताया कि शनिवार, रविवार और सोमवार को बैंक की बंदी होने के कारण एजेंसी में ज्यादा रुपयों का स्टॉक हो गया था। मंगलवार को बैंक के खुलते ही मुनीम की देखरेख में रखे रुपयों को जमा किया जाना था। राकेश ने बताया कि बदमाश लॉकर इसलिए नहीं खोल पाए क्योंकि उसकी चाबी उसके पास रहती थी जबकि आलमारी सहित अन्य चाबियां अशोक के पास रहती थी।

18 साल से काम कर रहे गार्ड ने पुलिस को छकाया
वाराणसी। परेड कोठी स्थित एजेंसी का सिक्योरिटी गार्ड गंगाराम यादव यहां 18 साल से काम कर रहा था। पहले यहां से लाटरी खेली जाती थी लेकिन बाद में यह खेल बंद हो गया तो भी गंगाराम काम करता रहा। सिगरा थाने पहुंचने पर गंगाराम ने पुलिस को बताया कि वह यादव नहीं दलित है। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो बताया कि नहीं उसका असली नाम गंगाराम यादव ही है।
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