वाराणसी। विद्या और कला जीवन में दोनों आवश्यक है। कला शरीर तो विद्या उसका प्राण है। लेकिन आज देश में कलाकारों का भरपूर सम्मान हो रहा है जबकि विद्या का सम्मान पिछड़ रहा है। यह बातें मंगलवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वाग्यदेवी मंदिर परिसर में प्रसिद्ध कथा वाचक रमेश भाई ओझा ने ज्ञान चर्चा समारोह में कहीं।
उन्होंने कहा कि अब हर कोई कलाकारों को सम्मानित कर अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। जबकि विद्या और विद्वानों का सम्मान नहीं किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने मंदिर को और सुंदर बनवाने को भी कहा। कहा कि सभी को वेद शास्त्रों को पढ़ने और मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार है। भारत के पायलट अभिनंदन ने हजारों फीट के ऊंचाई पर तीव्र गति से अपने बौद्धिक सोच से पाकिस्तान के युद्धक विमान को नष्ट कर दिया। इससे यह सिद्ध होता है कि यदि मंत्रों की शक्ति को अजमाया जाए तो वह एक विशेष शक्ति का रूप लेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि प्रतिमाह यहां शास्त्र चर्चा और बड़े संतों, कथाकारों और आध्यात्मिक गुरुओं का आगमन होता रहेगा। लगभग 20 वर्षों के बाद वेदांत शास्त्र के जानकार रमेशभाई ओझा का आगमन हुआ है। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजन प्रो. महेंद्रनाथ पांडेय संचालन प्रति कुलपति प्रो. हेतराम कछवाह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पूर्व कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा ने किया। कार्यक्रम में प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. हरिप्रसाद दीक्षित, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. प्रेमनारायण सिंह छात्र संघ अध्यक्ष प्रांजन पांडेय उपस्थित रहे।