विश्वविद्यालयों में विभाग को आधार बनाकर नियुक्ति करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब बीएचयू में रुकी पड़ी नियुक्तियों के शुरू होने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। हालांकि बीएचयू प्रशासन को अभी इस मामले में यूजीसी के निर्देशों का इंतजार है। इसके बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।
विश्वविद्यालयों में होने वाली नियुक्तियों में विभाग को आधार माना जाए या फिर विश्वविद्यालय को मानकर नियुक्तियां की जाए। इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें कोर्ट ने विभाग को ही आधार बनाकर नियुक्ति करने का आदेश दिया था। उधर, कोर्ट के इस फैसले से अंसतुष्ट कुछ लोगों के साथ ही यूजीसी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी गई। पिछले साल बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर पद पर होने वाली करीब 250 नियुक्तियों के लिए विज्ञापन निकाला जा चुका था। इसी बीच 19 जुलाई 2018 को यूजीसी की ओर से देश भर के विश्वविद्यालयों के कुलसचिव को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती देने का हवाला देते हुए अगले आदेश तक नियुक्ति पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। तब से नियुक्ति प्रक्रिया रुकी है लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। हालांकि नए सिरे से प्रक्रिया कब से शुरू होगी, इसका कोई फैसला नहीं हो पाया है। इस बारे में पूछे जाने पर बीएचयू के कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल यूजीसी के निर्देश पर ही नियुक्ति प्रक्रिया रूकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूजीसी के निर्देश का इंतजार है। इसके बाद ही अगली कार्रवाई होगी।
विश्वविद्यालयों में विभागवार शिक्षकों की नियुक्ति करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में बीएचयू गेट पर भगत सिंह छात्र मोर्चा से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। सदस्यों ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए पुतला भी फूंका। इस दौरान उनकी पुलिस से नोंकझोंक भी हुई। बीएचयू गेट पर हुई सभा के माध्यम से डॉ. शोभना नर्लिकर, कृष्ण कुमार, नीतिश कुमार, कन्हैया, अनुपम आदि ने विभागवार नियुक्ति होने से विश्वविद्यालय में आरक्षण पूरी तरह खत्म हो जाएगा जो संविधान के खिलाफ है।