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नए भारत के निर्माण में बनें सहयोगी

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वाराणसी। युवा भारतीय प्रवासियों का भारत से सांस्कृतिक और भावनात्मक लगाव हो। यहां की संस्कृति और विरासत की जानकारी हो। भारत की बेहतरी के संबंध में उनके क्या विचार व सुझाव हैं और यहां से क्या अपेक्षाएं हैं। केंद्रीय खेल, युवा एवं सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सोमवार को यह बातें दीनदयाल हस्तकला संकुल के सभागार में युवा भारतीय प्रवासियों से भेंट कार्यक्रम में कहीं।
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उन्होंने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंध जितने प्रगाढ़ होंगे, दुनिया में हिंदुस्तान का नाम उतना ही ऊपर होगा। इस दौरान आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस, बायो एनर्जी और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के लिए युवा भारतीय प्रवासियों का आह्वान किया गया।
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री डॉ. वीके सिंह ने कहा कि युवा भारतीय प्रवासी भारत की ताकत हैं। उनकी समस्याएं समझने और संबंधों को मजबूत करने के लिए विदेश मंत्रालय प्रतिबद्ध है। भारत के विकास में युवा भारतीय प्रवासियों का योगदान चाहिए।
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आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा- हमारा उद्देश्य है कि प्रवासी भारतीयों की तीसरी और चौथी पीढ़ी से देश का मेलजोल बढ़े। पता लगाना है कि युवा भारतीय प्रवासियों से संबंध कैसे और किस माध्यम से गहरे हो सकते हैं। देश की मौजूदा सरकार और विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावास युवा भारतीय प्रवासियों से संबंधों को मजबूती देने के लिए काम कर रहे हैं या नहीं...। इस बारे में युवा भारतीय प्रवासियों से संवाद स्थापित कर और अपनी सुना कर हम रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाएंगे।
भारत के विकास में योगदान देना चाहते हैं युवा प्रवासी
न्यूयार्क से आए डॉ. राकेश शर्मा ने कहा कि पेरिस में कोई अंग्रेजी नहीं बोलता, सभी फ्रेंच बोलते हैं। हम भारतीय खुद को ज्यादा समझदार और पढ़ा लिखा दिखाने के लिए अंग्रेजी में बात करने लगते हैं। हमें हिंदी का विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार करना चाहिए। सिडनी से आए नवल किशोर सिंह ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत के विकास में वे योगदान देना चाहते हैं। इसके लिए सरकार के साथ काम करना चाहते हैं। उनके पास कई आइडिया हैं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी। टोक्यो से आए शोध छात्र सौरभ शर्मा ने कहा कि वे न्यूक्लियर पॉवर के क्षेत्र में भारत के लिए योगदान देना चाहते हैं।
पैनल में ये रहे शामिल
युवा भारतीय प्रवासियों के सवालों का जवाब देने के लिए पैनल बनाया गया था। इसमें केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर व डॉ. वीके सिंह, विदेश मंत्रालय के सचिव ज्ञानेश्वर मुले, प्रवक्ता रवीश कुमार, रश्मि दास और शोभित माथुर शामिल थे। इसके अलावा आस्ट्रेलिया, इजरायल, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के पांच लोग शामिल थे।
इन कार्यों के लिए अनुशंसा
पैनल में शामिल सदस्यों ने 2017-18 में आयोजित प्रवासी सम्मेलन के आधार पर 11 बातों की अनुशंसा की। इसके तहत शार्ट टर्म और ऑनलाइन कोर्स हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में शुरू किए जाएं। प्रवासी भारतीयों के लिए सांस्कृतिक वीजा जारी किया जाए। भारतीय संगीत, इतिहास और संस्कृति पर कोर्स शुरू हों। भारत में शिक्षा के अवसरों की सूचना दी जाए। भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ युवा भारतीय प्रवासियों की बातचीत और मेलजोल बढ़ाया जाए। भारत में निवेश की संभावनाओं की जानकारी रोड शो, सेमिनार और कंपनियों की विजिट के साथ ही अन्य माध्यमों से दी जाए। उन भारतीयों की डिजिटल बिजनेस डायरेक्टरी बने जो विदेश में बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहे हैं। बिजनेस प्लान, प्रतियोगिता आदि का आयोजन कर प्रवासियों की भागीदारी बढ़ाई जाए। प्रवासी भारतीयों के साथ अलग-अलग देशों में स्टार्ट अप का आयोजन किया जाए। विचारशील प्रवासी भारतीयों का का समूह बनाया जाए जो भारत पर आधारित होकर यहां की बेहतरी के बारे में सोचे। विदेशों में रह रहे भारतीय छात्रों के संगठन को भारत से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इन सभी बिंदुओं पर काम किया जा रहा है।
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