गोपीगंज। सक्तेषगढ़ परमहंस आश्रम के संत स्वामी अड़गड़ानंद ने शनिवार को ककराही में भक्तों को आशीर्वचन दिया। इस दौरान उन्होंने मानव धर्म के साथ भगवत भक्ति का मर्म समझाया। कहा कि भगवान मनुष्य के हृदय में मिलते हैं। सच्चे मन से सद्कर्म करते जाओ। भगवान के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है।
शनिवार को इलाहाबाद श्रृंगवेरपुर आश्रम से लौटते समय गोपीगंज-मिर्जापुर मार्ग पर ककराही स्थित रामबाबू विश्वकर्मा के आवास पर उपस्थित हजारों भक्तों के बीच उन्होंने कहा कि भगवान मनुष्य के हृदय में बसते हैं, लेकिन परम तत्व में स्थित महापुरुष को ही सद्गुरु कहा जाता है। हृदय में स्थित परमात्मा भगवान स्वयं सहज प्रकाश स्वरूप हैं। उन्हें समझने के लिए मनुष्य को उन महापुरुषों के बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए। भगवान का भजन करने का कोई स्थान नहीं होता। सोते-जागते, उठते-बैठते किसी भी समय भगवान का ध्यान किया जा सकता है।
भगवान हमेशा अपने भक्तों पर दृष्टि रखते हैं। जैसी उसकी श्रद्धा होती है, वैसा ही उसको फल देते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुख की वाणी यथार्थ गीता के पढ़ने से मनुष्य के सारे भ्रम दूर हो जाते हैं। इस कड़ी में उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के पहले और अंत तक भगवान पांडवों के कल्याण के लिए ही सोचते रहे, क्योंकि वे लोग सत्य के मार्ग पर चल रहे थे। बिना प्रभु स्मरण के जीव का कल्याण संभव नहीं है। इस मौके पर बद्री बाबा, लाले बाबा, मोहन बाबा, आशीष बाबा, सुरेश बाबा, भाव बाबा, संतोष बाबा के साथ मौजूद रहे। औराई उप जिलाधिकारी केशवनाथ गुप्ता, रमेश चंद, गुलाबचंद, ज्वाला प्रसाद, डॉ. कृष्ण कुमार गुप्ता आदि ने भी आशीर्वाद लिया। प्रवचन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।