वाराणसी। विश्व गुरु भारत परिषद की ओर से रविवार को वरुणापुल स्थित लाल बहादुर शास्त्री घाट पर आयोजित बौद्धिक साहित्यिक विद्वत जन धर्माचार्य सम्मेलन में शंकराचार्य पद पर हुए चयन पर सवाल खड़े किए गए। विश्व गुरु भारत परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर महंत धर्मदास महाराज ने सम्मेलन में शंकराचार्य चयन प्रक्रिया पर कहा कि विश्व गुरु भारत परिषद की सहमति के बगैर स्वरूपानंद जी ने शंकराचार्य पद पर न्यायालय के आदेश को अनदेखी करके स्वयं को स्थापित किया। येे असंवैधानिक है। जगतगुरु पीठाधीश्वर महाकालेश्वर महाराज शंकराचार्य पद पर सुनियोजित षड्यंत्र के जरिए स्वामी स्वरूपानंद जी का प्रबल विरोध करते हुए घोषणा की है कि यदि शंकराचार्य पद पर सही पात्र का चयन नहीं किया जाएगा तो अगले दिनों में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आचार्य श्याम जी उपाध्याय ने संस्कृत समाज की ओर से सम्मेलन की सफलता के लिए लोगों को बधाई दी। विषय की स्थापना प्रस्तुत करते हुए न्यासी नरेंद्र नाथ दूबे ने कहा कि जो भारत में है वह कहीं नहीं है। सतयुग, द्वापर, त्रेता युग, कलयुग भारत का ही अद्भुत शक्ति है। इस मौके पर आचार्य शैलेंद्र त्रिपाठी, आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी, आचार्य छोटेलाल मिश्रा, श्याम जी उपाध्याय, शंभूनाथ उपाध्याय, रूबी सिंह आदि उपस्थित थीं। संचालन नरेंद्र नाथ दुबे तथा धन्यवाद बनारस बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी ने किया। अतिथियों का स्वागत नवीन प्रकाश, सुशील श्रीवास्तव, अनिल जायसवाल, प्रहलाद जायसवाल, दिलीप मिश्रा, सुशील जौहरी, प्रदीप मिश्र, विजेंद्र मिश्र, धर्मवीर मौर्या, रवि मौर्य आदि ने किया।