वाराणसी। बाइस सफर चेहल्लुम के सिलसिले से रविवार को शिवाला स्थित स्व. फिदा हुसैन के इमामबाड़े से करीब 200 साल पुराना अलम, दुलदुल का जुलूस अकीदत के साथ निकला। इस दौरान अंजुमन जव्वादिया पितरकुंडा, गुलजारे अब्बासिया शिवाला,कासिमिया अब्बासिया गौरीगंज और निशाने अली शिवाला ने नौहों से नजराने अकीदत पेश किया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ देर रात शिवाला घाट गंगा किनारे समाप्त हुआ।
इस दौरान कई जगहों पर मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। मस्जिद मीरनादे अली चाहमामा दालमंडी में मौलाना तहजीबुल हसन इमामे जुमा रांची ने मजलिस को खिताब किया। अंजुमन हैदरी चौक ने नौहा मातम किया। ऐसे ही चौहट्टा लाल खां में जहनबिया इमामबाड़े पर अंजुमन आबिदिया के जेरे इंतजाम आठ दिवसीय मजलिस के दूसरे दिन बड़ी तादात में अजादारों ने शिरकत की। कालीमहल स्थित स्व.मिर्जामुन्ने के निवास पर कदीमी मजलिस का आयोजन हुआ। नौजवानों ने नौहा और मातम से इमाम की शान में नजराना पेश किया। इस अवसर पर हजरत अली कमेटी के सचिव फरमान हैदर ने बताया कि तकरीबन 1400 साल पहले इमाम हुसैन ने दुआ मांगते हुए कहा था कि ऐ अल्लाह जिसने तुझे खोया उसने क्या पाया और जिसने तुझे पाया, उसने क्या खोया। बताया कि जुलूसों का सिलसिला दो दिन और जारी रहेगा।