वाराणसी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत सांस्कृतिक संकुल में बुधवार से शुरू हुए दस दिवसीय गांधी शिल्प बाजार-2017 में पहले ही दिन जमकर हंगामा मचा। वजह, स्टॉल आवंटन में धनउगाही। स्टॉल के लिए दो हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक वसूले जाने का आरोप लगाते हुए बाहर से आए कई शिल्पी हंगामे पर उतर आए। उनका कहना था कि दलालों के जरिए स्टॉल आवंटित किए जा रहे हैं। पैसे नहीं देने वालों को कागजी प्रक्रिया और नियमों का हवाला देकर टरका दिया जा रहा है। स्टॉल न मिल पाने से कई शिल्पी अपने सामान लेकर संकुल परिसर में भटकते नजर आए।
शिल्प बाजार में 302 स्टॉलों के अलावा 50 से अधिक शिल्पियों को खुले में दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है। इनका आवंटन पर्यटन विभाग, डीआईसी और हस्तशिल्प विभाग की ओर से किया गया है। कश्मीर, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आए कई शिल्पियों को जब स्टॉल नहीं मिल पाया तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि यहां दलालों के जरिए सभी विभागों से स्टॉल आवंटित करा लिए गए हैं और अब उसके लिए उनसे मनमाना रकम मांगी जा रही है। कश्मीर से आए आमिर ने बताया कि उन्हें फोन पर पर्यटन विभाग ने यहां बुलाया और अब आने के बाद कह रहे हैं कि स्टॉल खाली नहीं है। पांच दिन से वह सामान के साथ धक्के खा रहे हैं। सीतापुर के रईसुल हसन ने कहा कि यहां जमकर मनमानी हो रही है। इसकी प्रशासन जांच करे और बाहर से आए शिल्पियों, बुनकरों को स्टॉल उपलब्ध कराए जाएं।
अविनाश चंद्र मिश्रा, पर्यटन ने बताया कि शिल्प मेले में स्टॉलों का आवंटन नियमानुसार ही किया गया है। स्टॉल न मिल पाने से जो असंतुष्ट हैं वही हंगामा मचा रहे हैं और मनगढंत आरोप लगा रहे हैं।