वाराणसी नगर निगम आम आदमी से बकाए की वसूली के लिए नोटिस देने के साथ-साथ संपत्ति की कुर्की और नीलामी भी करा देता है। दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकार के विभागों ने नगर निगम को गृह कर का बकाया नहीं दिया है।
29 अक्तूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में नगर निगम का सरकारी विभागों पर 12 करोड़ 60 लाख से अधिक बकाया चल रहा है। इसमें सबसे बड़ा बकाएदार बीएसएनएल है तो डीएम कार्यालय से पुलिस विभाग भी इसी दायरे में हैं।
निगम का एक वर्ष का गृह कर की वसूली का लक्ष्य 38 से 40 करोड़ रुपये होता है। इस राशि का एक तिहाई केवल सरकारी विभाग ही दबाए हुए हैं। सरकारी विभाग होने के कारण निगम दबाव भी नहीं बना पा रहा है। यदि ये विभाग अपना गृह कर बकाया जमा कर दें तो निगम का आर्थिक संकट काफी हद तक खत्म हो सकता है।
उधर, निगम का बिजली विभाग पर 4133736 रुपये और जल संस्थान पर भी 13839607 रुपये बकाया है लेकिन इन दोनों विभागों का समायोजन साल के अंत में किया जाता है। इस दौरान निगम का जितना बिजली का बकाया होता है, उसमें से हाउस टैक्स घटाकर निगम में जमा कराया जाता है जबकि जल संस्थान के साथ भी जल कर घटाकर गृह कर की राशि वसूल की जाती है।
नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि सरकारी विभागों को भी नोटिस जारी कर उनसे बकाए की मांग की जाती है। जैसे-जैसे बजट आता है, वे उसे जमा करते रहते हैं। केंद्र सरकार के विभागों के साथ बैठक करके विषमताओं को दूर कर बकाए की वसूली की जानी है।