वाराणसी। असि नदी के दोनों किनारों पर लोगों ने कब्जा कर बड़ी-बड़ी इमारतें बना ली हैं। असि की कागजों पर चौड़ाई तो 25 मीटर तक है लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह दो से चार फीट में ही सिमट कर रह गई है। वीडीए की नाक के नीचे नदी क्षेत्र में अवैध लगातार निर्माण होते जा रहे हैं। नगर निगम की उदासीनता से असि के अलावा वरुणा नदी में कूड़ा डंपिंग भी की जा रही है।
दूसरी ओर अतिक्रमणकारियों, प्रदूषणकारियों और भूमाफियाओं के कारण असि संकट में है। अत्यधिक जलदोहन एवं सीधे गिर रहे नालों के मलजल की मात्रा बढ़ने से नदी के जल में लेड, क्रोमियम, निकल और जस्ता आदि की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। प्रदूषण व गंदगी से जल-जीव लगभग समाप्त हो चुके हैं। असि में पानी की मात्रा कम कचरा ज्यादा नजर आता है।
बीएचयू के अवकाश प्राप्त नदी वैज्ञानिक प्रो. यूके चौधरी ने असि से जुड़े सारे प्रमाण प्रदेश और केंद्र सरकार को उपलब्ध कराए हैं फिर भी नदी के संरक्षण की दिशा में अब तक सार्थक प्रयास नहीं हो सका। इस बारे में नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि असि नदी का ड्रोन सर्वे कराया जा चुका है। अवैध निर्माण को लेकर अब स्थलीय सर्वे किया जाएगा।
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रेत के पुल जैसा बना दिया वरुणा कॉरिडोर
- केवल सुंदरीकरण हुआ, ड्रेजिंग और नेविगेशन का ध्यान नहीं
पर्यटन और नौकायन के हिसाब से तैयार किया गया वरुणा कॉरिडोर प्रोजेक्ट फेल हो चुका है। प्रोजेक्ट में वाटर मैनेजमेंट सिस्टम, साफ पानी और टूरिस्ट रिवर फ्रंट विकसित करना था।
काशी में नौकायन के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा, सुंदरीकरण और वायु प्रदूषण को बचाने के लिहाज से 2013 में केंद्र सरकार के आदेश पर वीडीए ने वरुणा कॉरिडोर की योजना बनाई गई। इसके डीपीआर में वरुणा के तलहटी को ड्रेजिंग करके वहां वाटर नेविगेशन सही करना था। इसमें पर्यटकों को नाव के माध्यम से गंगा तक ले जाना, रात में नौकायन के साथ पूरे क्षेत्र को वरुणा की ओर फेसिंग करने के अलावा प्रयागराज से काशी आने वाले लोगों को भी वरुणा के माध्यम से लाने की योजना थी।
बाद में इस प्रोजेक्ट में बाकी का हिस्सा छोड़कर केवल सुंदरीकरण किया जा रहा है। योजना के अनुसार न तो वरुणा की ड्रेजिंग की गई है और न ही नदी की चौर्ड़ाई को नहर जैसा किया गया है। रेलिंग के लो लेबल पर बनाने के कारण यहां पानी का फ्लो भी नहीं बन रहा है।
जब तक प्रोजेक्ट की डीपीआर के मुताबिक काम नहीं होगा, इसका फिजिविल होना मुश्किल है। अब तक किया गया सुंदरीकरण का कार्य भी मानकों के अनुसार नहीं है।
- श्याम लाल सिंह, प्लानर इंडिया