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तकनीकी दक्षता के साथ ही बढ़ेगा स्टार्टअप

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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के सातवें दीक्षांत समारोह में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि डीआरडीओ के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी ने संस्थान में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ स्टार्टअप को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर ही मेक इन इंडिया के सपने को साकार किया जा सकेगा। समारोह में 50 छात्रों को 76 मेडल और 1191 मेधावियों को उपाधियां दी गई।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में डॉ. जी सतीश रेड्डी ने कहा कि टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के लिए इनोवेशन पर जोर देना होगा। जिससे ज्यादा से ज्यादा तकनीकी आधारित उत्पाद बनाए जा सकें और मेक इन इंडिया का सपना पूरा किया जा सके। भावी इंजीनियरों का आह्वान करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि एक इंजीनियर के तौर पर सोच हमेशा तार्किक होनी चाहिए। इससे पहले आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने संस्थान की उपलब्धियों की चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने किया। इस दौरान शैक्षणिक कार्य के अधिष्ठाता प्रोफेसर एएसके सिन्हा, अनुसंधान एवं विकास के अधिष्ठाता प्रोफेसर राजीव प्रकाश, ज्वाइंट चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर प्रभाकर सिंह, प्रोफेसर पीके मिश्रा, प्रोफेसर आरएस सिंह, प्रोफेसर बी मिश्रा सहित कई शिक्षक, अधिकारी, छात्र मौजूद रहे।
डिफेंस कारीडोर में अहम भूमिका
डीआरडीओ चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने डिफेंस कॉरीडोर बनाए जाने की जो घोषणा की है, उसमें आईआईटी बीएचयू नॉलेज पार्टनर की भूमिका में काम करेगा। यह संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। समारोह से पहले पत्रकारों से बातचीत में चेयरमैन ने कहा कि डीआरडीओ और आईआईटी (बीएचयू) साथ मिलकर प्रदेश में रक्षा आधारित ज्यादा से ज्यादा उद्योग सृजित कर सकें, इसका यही उद्देश्य है। इस बारे में निदेशक के साथ बातचीत करने के साथ ही डीआरडीओ की ओर से एक टीम जल्द ही संस्थान में आकर शिक्षकों से बातचीत और दौरा भी करेगी।
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टॉपर रामपाल को प्रेसीडेंट मेडल
समारोह में टॉपर इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के छात्र रामपाल सिंह ने सर्वाधिक 14 मेडल पाकर प्रेसीडेंट मेडल अपने नाम किया। खास बात यह है कि प्रेसीडेंट मेडल पहली बार दिया गया है। बलिया के लहसनी निवासी डॉ. रामाशीष सिंह के पुत्र रामपाल इस समय में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय केसीडॉट में रिसर्च इंजीनियर पद पर तैनात हैं। इसके पहले उनके बड़े भाई को भी इसी संस्थान में मेडल मिल चुका है। रामपाल ने बताया कि इस उपलब्धि के बाद जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन, संगठनात्मक क्षमता पर डायरेक्टर मेडल पाने वाले आमोद हेगड़े ने बताया कि पहली बार गेाल्ड मेडल मिला है, इस ऐतिहासिक दिन को वह और उनका परिवार कभी भूल नहीं सकता।
किसको कितने मेडल
मानस सिन्हा, अंकुश बंसल को सात-सात मेडल
अमन गुप्ता, ठाकेर पार्थ परेश को पांच-पांच मेडल
आकाश चौरसिया, जिल्ले अली को तीन-तीन मेडल
राहुल वर्मा, अरूण चांद, बलजिंदर कुमार बधान, शुभम चैधरी, अनित्य गुप्ता को दो-दो मेडल
तान्या मौर्या, श्रेया पांडेय, इशा अग्रवाल, राशि चंदोला, सृष्टि शुक्ला, स्वाति राय को इंदिरा त्रिपाठी गोल्ड मेडल
अनुभा जोशी, भावना वर्मानी, शैलेन्द्र कुमार सिंह, शुभि गुप्ता, आकृति मिश्रा, प्रिया कुमारी, जयदीप बनीक मजूमदार, सुचित पांडेय, कृष्ण कांत दूबे, संदीप, गीतम सिंह, जय सिंह, अमिताभ कुमार सिंह, स्मृति गुप्ता, नमन कटाल, अभिनव गुप्ता, मनुज कुमार सिंह, कार्तिकेय गुप्ता, अभिनव डीआरपी, लक्ष्य नरूला, सैय्यद काजिम अब्बास, कार्तिम मनचंदा, असीम गोसाईं, इशिता व्यास, कार्तिका आहूजा, वर्णिता वाजपेयी, आभास शिखर, जूही सिंह, विरेंद्र त्यागी, प्रखर दोरवार, धीरज कुमार महतो, मोहित गुप्ता, रजनीश कुमार को एक-एक मेडल
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